झारखंड पुलिस में ‘क्लीन स्वीप’ अभियान: भ्रष्टाचार और लापरवाही पर बड़ा प्रहार, एक माह में 21 दारोगा निलंबित
राष्ट्रीय समाचार डेस्क :झारखंड पुलिस विभाग में इन दिनों अनुशासन और जवाबदेही को लेकर बड़ा अभियान चल रहा है। पुलिस मुख्यालय ने भ्रष्टाचार, कर्तव्य में लापरवाही और अपराधियों से सांठगांठ के मामलों पर सख्त रुख अपनाते हुए ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति लागू कर दी है। इसका असर अब जमीन पर साफ दिखाई देने लगा है। पिछले एक महीने के भीतर राज्य के विभिन्न जिलों में नौ थाना प्रभारियों समेत 21 सब-इंस्पेक्टर (SI) को निलंबित किया गया है। लगातार हो रही इस कार्रवाई से पुलिस महकमे में हड़कंप मचा हुआ है और विभागीय अनुशासन को लेकर गंभीर संदेश गया है।
लगातार कार्रवाई से बढ़ी बेचैनी
पुलिस मुख्यालय से मिले निर्देशों के बाद जिला स्तर पर पुलिस अधिकारियों की कार्यशैली की समीक्षा तेज कर दी गई है। जनता की शिकायतों, थानों की कार्यप्रणाली और लंबित मामलों की जांच के आधार पर कई अधिकारियों पर कार्रवाई की गई है। पुलिस सूत्रों के अनुसार अब केवल चेतावनी देकर छोड़ने की बजाय सीधे विभागीय कार्रवाई की जा रही है।
कहां-कहां हुई कार्रवाई
- बोकारो में बड़ी कार्रवाई
05 मई को बोकारो जिले के चीराचास थाना प्रभारी पुष्पराज कुमार, एसआई राजेश कुमार और एएसआई संजय कुमार मंडल को एसपी नाथू सिंह मीणा ने निलंबित कर दिया। इन पर कार्य में लापरवाही और विभागीय नियमों के उल्लंघन के आरोप लगे हैं।
- कोडरमा में थाना प्रभारी सस्पेंड
02 मई को कोडरमा जिले के सतगावां थाना प्रभारी सौरभ कुमार शर्मा को कार्य में गंभीर लापरवाही के आरोप में निलंबित कर पुलिस मुख्यालय भेज दिया गया। बताया जा रहा है कि थाना संचालन और मामलों के निष्पादन को लेकर लगातार शिकायतें मिल रही थीं।
- पिंडराजोड़ा थाना में सबसे बड़ी कार्रवाई
11 अप्रैल को बोकारो जिले के पिंडराजोड़ा थाना में पुलिस विभाग की सबसे बड़ी कार्रवाई सामने आई। अभियुक्तों से सांठगांठ और विभागीय अनियमितताओं के आरोप में 10 सब-इंस्पेक्टर समेत कुल 28 पुलिसकर्मियों को एक साथ निलंबित कर दिया गया। इस कार्रवाई ने पूरे राज्य पुलिस महकमे को झकझोर दिया।
- चंद्रपुरा थाना में रिकॉर्ड अव्यवस्था पर कार्रवाई
11 अप्रैल को ही चंद्रपुरा थाना प्रभारी अजय कुमार सिंह को थाना रिकॉर्ड अपडेट नहीं रखने और फाइलों में भारी अव्यवस्था पाए जाने पर निलंबित कर दिया गया। जांच में कई महत्वपूर्ण दस्तावेज अधूरे और लंबित पाए गए थे।
- चतरा में अनुशासनहीनता पर गिरी गाज
09 अप्रैल को चतरा जिले के गिद्धौर थाना प्रभारी समेत दो जवानों को अनुशासनहीनता और कार्य में लापरवाही के आरोप में निलंबित किया गया। विभागीय जांच में कई गंभीर कमियां सामने आई थीं।
पुलिस मुख्यालय की सख्त निगरानी
सूत्रों के अनुसार डीजीपी मुख्यालय ने सभी जिलों के एसपी और वरिष्ठ अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जनता की शिकायतों को प्राथमिकता दी जाए और भ्रष्ट या लापरवाह अधिकारियों को तत्काल चिन्हित कर कार्रवाई की जाए। पुलिस विभाग अब थानों की कार्यशैली, लंबित मामलों, रिकॉर्ड प्रबंधन और जनता से व्यवहार तक की नियमित समीक्षा कर रहा है।
विभाग की छवि सुधारने की कोशिश
लगातार हो रही कार्रवाई को पुलिस विभाग अपनी छवि सुधारने की दिशा में बड़ा कदम मान रहा है। आम लोगों का विश्वास जीतने के लिए विभाग अब जवाबदेही तय करने पर जोर दे रहा है। हालांकि, इतने बड़े पैमाने पर पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई होने से विभाग की आंतरिक व्यवस्था और निगरानी तंत्र पर भी सवाल उठ रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि केवल निलंबन से व्यवस्था में स्थायी सुधार संभव नहीं है। इसके लिए प्रशिक्षण, निगरानी तंत्र की मजबूती, तकनीकी सुधार और जवाबदेही की स्पष्ट व्यवस्था जरूरी होगी।
पुलिस विभाग का संकेत
पुलिस विभाग के उच्च सूत्रों ने साफ संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में भी कार्रवाई का सिलसिला जारी रहेगा। विभागीय स्तर पर भ्रष्टाचार, अनुशासनहीनता और अपराधियों से सांठगांठ के मामलों में किसी भी प्रकार की नरमी नहीं बरती जाएगी।
“पुलिस की कार्यशैली पर जिला स्तर से लेकर मुख्यालय तक पैनी नजर रखी जा रही है। लापरवाही या भ्रष्टाचार किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।” — पुलिस विभाग के उच्च सूत्र का संकेत
Author: Rashtriy Samachar
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