दुर्गा पूजा को लेकर हजारीबाग प्रशासन सख्त, पूजा पंडालों में सीसीटीवी, बैरिकेडिंग और अग्नि सुरक्षा अनिवार्य
सदर एसडीएम ने जारी किए दिशा-निर्देश, रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक लाउडस्पीकर पर रोक; आयोजकों को सुरक्षा व्यवस्था दुरुस्त रखने का निर्देश
हजारीबाग। दुर्गा पूजा के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा, शांति और विधि-व्यवस्था बनाए रखने को लेकर सदर अनुमंडल दंडाधिकारी ने आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए हैं। प्रशासन ने सभी दुर्गा पूजा समितियों, मेला आयोजकों, डांडिया, आर्केस्ट्रा और अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों के संचालकों को निर्देशों का अनिवार्य रूप से पालन करने को कहा है। इस वर्ष दुर्गा पूजा का आयोजन 11 से 20 अक्टूबर 2026 तक किया जा रहा है। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पूजा पंडालों और विभिन्न कार्यक्रमों में पहुंचने की संभावना है।
सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण पर विशेष जोर
प्रशासन ने पूजा पंडालों के निर्माण में नायलॉन, सिंथेटिक और अन्य ज्वलनशील पदार्थों के इस्तेमाल पर रोक लगाई है। सभी पंडालों और आसपास के मार्गों पर साफ-सफाई तथा पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया है। भीड़ नियंत्रण के लिए बैरिकेडिंग और पुरुषों एवं महिलाओं के लिए अलग-अलग प्रवेश तथा निकास द्वार बनाना आवश्यक होगा।
असामाजिक तत्वों पर निगरानी रखने और व्यवस्था संभालने के लिए आयोजकों को पहचान-पत्र एवं निर्धारित ड्रेस कोड के साथ स्वयंसेवक तैनात करने का निर्देश दिया गया है। छोटे-बड़े सभी पूजा पंडालों में सीसीटीवी कैमरे और एलईडी स्क्रीन के माध्यम से निगरानी की व्यवस्था करने को भी कहा गया है। बिजली बाधित होने की स्थिति से निपटने के लिए इन्वर्टर या जनरेटर की वैकल्पिक व्यवस्था रखने का निर्देश दिया गया है।
अग्नि सुरक्षा और चिकित्सा सुविधा जरूरी
आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने के लिए प्रत्येक पूजा पंडाल में प्राथमिक उपचार किट रखना और निकटवर्ती अस्पताल से समन्वय स्थापित करना अनिवार्य होगा। अग्नि सुरक्षा के लिए पर्याप्त अग्निशमन उपकरण उपलब्ध रखने के साथ फायर ब्रिगेड के आवागमन हेतु सुगम मार्ग सुनिश्चित करना होगा। आयोजकों को अग्नि सुरक्षा पदाधिकारी से समन्वय कर उनके निर्देशों का पालन करने को कहा गया है।
पंडालों, मेलों और सांस्कृतिक कार्यक्रम स्थलों से पर्याप्त दूरी पर पार्किंग की व्यवस्था करनी होगी। यातायात नियंत्रण और शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए संबंधित थाना प्रभारी के साथ समन्वय स्थापित करना भी आवश्यक होगा।
रात 10 बजे के बाद लाउडस्पीकर पर रोक
ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन ने लाउडस्पीकर अधिनियम, 1955 और ध्वनि प्रदूषण संबंधी नियमों का पालन करने का निर्देश दिया है। ध्वनि का स्तर निर्धारित मानकों के अनुरूप रखना होगा। जारी निर्देशों के अनुसार, रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक लाउडस्पीकर का उपयोग नहीं किया जाएगा।
हथियारों पर प्रतिबंध, आपत्तिजनक गीतों पर भी रोक
मेला परिसर में अस्त्र-शस्त्र, घातक हथियार, आग्नेयास्त्र और लाठी लेकर चलने पर प्रतिबंध रहेगा। पूजा समितियों एवं कार्यक्रम आयोजकों को इस पर लगातार निगरानी रखने को कहा गया है। इसके साथ ही किसी भी धर्म या समुदाय की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाले वक्तव्य, गीत अथवा अश्लील गानों के इस्तेमाल पर रोक रहेगी।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि मेला, डांडिया, आर्केस्ट्रा और अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों के दौरान विधि-व्यवस्था से जुड़ी समस्या उत्पन्न होने पर संबंधित आयोजक एवं संचालक की जवाबदेही होगी।
प्रशासन ने सहयोग की अपील की
सदर अनुमंडल दंडाधिकारी ने सभी पूजा समितियों और कार्यक्रम आयोजकों से दिशा-निर्देशों का गंभीरता से पालन करने की अपील की है। प्रशासन का उद्देश्य सभी आवश्यक सुरक्षा इंतजाम सुनिश्चित कर दुर्गा पूजा को शांतिपूर्ण, सुरक्षित और सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न कराना है। इसके लिए आयोजकों से प्रशासन एवं पुलिस के साथ समन्वय बनाए रखने को कहा गया है।
Author: Ashish Yadav
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