हजारीबाग में ‘हर घर नल’ का दावा फेल, सड़क पर बह रहा पानी और घरों में सूखे नल
एक ओर पाइपलाइन से लाखों लीटर पानी बर्बाद, दूसरी ओर महिलाएं सिर पर ढो रहीं पानी
विकास के दावों और जमीनी हकीकत के बीच फंसी जनता, जल संकट पर उठे गंभीर सवाल
हजारीबाग:-किसी भी शहर की पहचान उसकी सड़कें, बुनियादी सुविधाएं और नागरिकों का जीवन स्तर तय करता है। लेकिन हजारीबाग में विकास के बड़े-बड़े दावों के बीच जलापूर्ति व्यवस्था की हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। शहर में एक ओर महिलाएं और बच्चे रोजाना पेयजल के लिए लंबी दूरी तय करने को मजबूर हैं, वहीं दूसरी ओर फटी पाइपलाइन से हजारों-लाखों लीटर पानी सड़कों पर बहकर बर्बाद हो रहा है।शहर के कई इलाकों में सुबह का नजारा किसी जल संकटग्रस्त गांव जैसा दिखाई देता है। महिलाएं सिर पर बाल्टी, गैलन और पानी के बर्तन लेकर घरों से निकलती हैं और पेयजल की तलाश में एक से दो किलोमीटर तक का सफर तय करती हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि यह संघर्ष व्यस्त सड़कों के किनारे हो रहा है, जहां हर समय दुर्घटना का खतरा बना रहता है।
सड़क पर ‘जलप्रपात’, घरों में सूखे नल
छठ तालाब के समीप सड़क के बीचों-बीच फटी पाइपलाइन से लगातार पानी बह रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई दिनों से पानी इसी तरह बर्बाद हो रहा है, लेकिन मरम्मत के लिए कोई ठोस पहल नहीं की गई। एक तरफ लोग एक-एक बूंद पानी के लिए परेशान हैं, दूसरी तरफ सरकारी जलापूर्ति का पानी नालियों और सड़कों में बहकर बर्बाद हो रहा है।स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि संबंधित विभाग को कई बार सूचना देने के बावजूद स्थिति जस की तस बनी हुई है। इससे न केवल पानी की बर्बादी हो रही है, बल्कि सड़कें भी क्षतिग्रस्त हो रही हैं।
केंद्र सरकार की ‘हर घर नल’ योजना और राज्य सरकार की विभिन्न पेयजल योजनाओं के तहत हर घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाने का दावा किया गया है। करोड़ों रुपये खर्च कर पाइपलाइन बिछाई गईं, जलमीनारें बनाई गईं और योजनाओं का उद्घाटन भी हुआ। लेकिन जमीनी स्तर पर आज भी बड़ी संख्या में लोग नियमित जलापूर्ति से वंचित हैं।स्थानीय महिलाओं का कहना है कि चुनाव के समय जनप्रतिनिधि पानी की समस्या दूर करने का आश्वासन देते हैं, लेकिन चुनाव खत्म होते ही समस्याएं भी भुला दी जाती हैं। उनका कहना है कि पानी जैसी मूलभूत आवश्यकता के लिए रोजाना संघर्ष करना पड़ रहा है।लोगों के मन में कई सवाल उठ रहे हैं की जब हर घर तक पानी पहुंचाने का दावा किया गया है तो लोग आज भी पानी ढोने को क्यों मजबूर हैं,फटी पाइपलाइनों की मरम्मत समय पर क्यों नहीं हो रही,जलापूर्ति योजनाओं पर खर्च हुए करोड़ों रुपये का लाभ आम लोगों तक कब पहुंचेगा,पानी की बर्बादी रोकने के लिए जिम्मेदार विभाग क्या कार्रवाई कर रहा है।विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती आबादी और घटते जल स्रोतों के बीच पेयजल का संरक्षण बेहद जरूरी है। ऐसे में पाइपलाइन लीकेज से होने वाली पानी की बर्बादी प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करती है। यदि समय रहते व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में जल संकट और गहरा सकता है।
फिलहाल हजारीबाग में तस्वीर बेहद विडंबनापूर्ण है—सड़क पर पानी बह रहा है और घरों में नल सूखे पड़े हैं। विकास के दावों और हकीकत के बीच पिस रही जनता अब जवाब और समाधान दोनों की प्रतीक्षा कर रही है।


