हजारीबाग में फिर सक्रिय हुआ अवैध लॉटरी सिंडिकेट, पुलिस के आदेश बेअसर!
आनंदा चौक से सिंदूर चौक तक खुलेआम बिक रहीं टिकटें, चंद घंटों में अमीर बनने का सपना दिखाकर गरीबों की जेब पर डाका
हजारीबाग:-देशभर में जुआ और अवैध सट्टेबाजी के खिलाफ लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं, लेकिन हजारीबाग में अवैध लॉटरी कारोबारियों के हौसले इतने बुलंद हैं कि वे पुलिस और प्रशासन के निर्देशों को भी चुनौती देते नजर आ रहे हैं। शहर के प्रमुख बाजारों और चौक-चौराहों पर खुलेआम अवैध लॉटरी टिकटों की बिक्री हो रही है, जबकि पुलिस मुख्यालय से लेकर जिला स्तर तक कई बार इस पर कार्रवाई के निर्देश जारी किए जा चुके हैं।शहर के आनंदा चौक, बड़ा बाजार, मटवारी, कनहरी रोड, सिंदूर चौक, झंडा चौक और आसपास के इलाकों में अवैध लॉटरी का नेटवर्क तेजी से फैल चुका है। स्थिति यह है कि कई जगहों पर टिकट बेचने वाले बिना किसी डर के दुकान लगाकर कारोबार कर रहे हैं, जबकि कुछ स्थानों पर पान-गुमटी और अन्य दुकानों की आड़ में यह खेल संचालित किया जा रहा है।
गरीबों को बनाया जा रहा निशाना
अवैध लॉटरी कारोबार का सबसे बड़ा शिकार निम्न और मध्यम आय वर्ग के लोग बन रहे हैं। एजेंट लोगों को यह कहकर फंसाते हैं कि कुछ ही घंटों में उनकी किस्मत बदल सकती है। 50 या 100 रुपये से शुरुआत करने की सलाह देकर धीरे-धीरे उन्हें बड़े दांव लगाने के लिए प्रेरित किया जाता है।
जानकार बताते हैं कि एजेंट पहले कुछ लोगों की जीत की कहानियां सुनाते हैं और दावा करते हैं कि रोजाना हजारों रुपये का इनाम निकलता है। कई मामलों में एजेंट खुद टिकट चुनकर ग्राहकों को देते हैं और कहते हैं कि “इस नंबर के आने की संभावना सबसे ज्यादा है।” इस लालच में लोग अपनी मेहनत की कमाई दांव पर लगा देते हैं।
आर्थिक बर्बादी की ओर बढ़ रहे परिवार
सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि अवैध लॉटरी केवल कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक संकट भी है। कई लोग जल्दी पैसा कमाने के चक्कर में अपनी रोजमर्रा की जरूरतों का पैसा तक लॉटरी में लगा रहे हैं। नतीजा यह है कि परिवारों में तनाव बढ़ रहा है और आर्थिक स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है।ग्रामीण क्षेत्रों में भी इस कारोबार की पहुंच बढ़ने लगी है। जिले के कई प्रखंडों में एजेंटों का नेटवर्क सक्रिय बताया जा रहा है, जो गांव-गांव जाकर टिकट बेच रहे हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब शहर के व्यस्त इलाकों में खुलेआम टिकट बेची जा रही हैं तो संबंधित थाना पुलिस को इसकी जानकारी क्यों नहीं है? स्थानीय लोगों का आरोप है कि पुलिस की निष्क्रियता के कारण ही यह कारोबार फल-फूल रहा है।सूत्रों का दावा है कि कारोबारियों का एक संगठित नेटवर्क काम कर रहा है, जिसके तहत एजेंट, सप्लायर और संग्रहकर्ता मिलकर पूरे सिस्टम को संचालित करते हैं। यही वजह है कि समय-समय पर कार्रवाई की खबरें आने के बावजूद कारोबार बंद नहीं हो रहा।मामले को लेकर हजारीबाग पुलिस अधीक्षक अमन कुमार ने कहा है कि जिले में अवैध रूप से संचालित लॉटरी कारोबार के खिलाफ सभी थाना प्रभारियों को सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि आदेश के बावजूद कार्रवाई नहीं होने के कारणों की रिपोर्ट तलब की जा रही है। यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।लेकिन सबसे बड़ा सवाल आखिर किसके संरक्षण में चल रहा कारोबार..?
जब पुलिस के निर्देश मौजूद हैं, शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं और शहर के प्रमुख स्थानों पर खुलेआम टिकटों की बिक्री हो रही है, तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर इस अवैध कारोबार को संरक्षण कौन दे रहा है? यदि समय रहते इस नेटवर्क पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो यह न केवल कानून-व्यवस्था के लिए चुनौती बनेगा, बल्कि सैकड़ों परिवारों की आर्थिक स्थिति को भी प्रभावित करता रहेगा।
फिलहाल शहरवासियों की निगाहें प्रशासन और पुलिस की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। क्या अवैध लॉटरी सिंडिकेट पर शिकंजा कसेगा या फिर यह कारोबार पहले की तरह बेखौफ चलता रहेगा, इसका जवाब आने वाले दिनों में सामने आएगा।


