विनोबा भावे विश्वविद्यालय में वित्तीय एवं प्रशासनिक अनियमितताओं की जांच की मांग तेज
छात्र हितों की अनदेखी और करोड़ों के संभावित घोटाले को लेकर शिक्षा मंत्री को सौंपा गया आवेदन
हजारीबाग/रांची : विनोबा भावे विश्वविद्यालय (VBU) में कथित वित्तीय, प्रशासनिक एवं शैक्षणिक अनियमितताओं को लेकर अब छात्र संगठनों का आक्रोश खुलकर सामने आने लगा है। छात्र नेता चन्दन सिंह ने झारखंड सरकार के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री को एक विस्तृत आवेदन सौंपते हुए विश्वविद्यालय के पिछले दो वर्षों के कार्यकाल की उच्च स्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। आवेदन में विश्वविद्यालय प्रशासन पर छात्रों के हितों की अनदेखी, वित्तीय गड़बड़ी और प्रशासनिक अव्यवस्था के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार छात्र नेता ने कहा कि पिछले कई महीनों से विश्वविद्यालय में हो रही कथित अनियमितताओं की जानकारी लगातार सरकार और विभाग को दी जाती रही है, लेकिन अब तक किसी भी मामले में ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इससे छात्रों और शिक्षकों के बीच असंतोष का माहौल बनता जा रहा है।
परीक्षा शुल्क राशि को लेकर गंभीर सवाल
आवेदन में आरोप लगाया गया है कि हजारों छात्रों द्वारा परीक्षा प्रपत्र भरने के लिए जमा की गई राशि विश्वविद्यालय के खाते में जमा नहीं होने का मामला अत्यंत गंभीर है। इस मामले में जांच समिति का गठन तो किया गया, लेकिन अब तक किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं होने से पूरे मामले पर सवाल उठ रहे हैं।
छात्र नेता का कहना है कि कोरोना काल के बाद विश्वविद्यालय की अधिकांश प्रक्रियाएं ऑनलाइन हो चुकी हैं, इसके बावजूद छात्रों से अतिरिक्त शुल्क वसूला जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि ऑनलाइन एडमिट कार्ड उपलब्ध कराए जाने के बावजूद छात्रों से अलग से शुल्क लिया जा रहा है और संबंधित निजी कंपनियों को भुगतान किया जा रहा है। इससे करोड़ों रुपये के संभावित घोटाले की आशंका जताई गई है।
PM-USHA योजना और Chancellor Portal की भी जांच की मांग
प्रेस विज्ञप्ति में Chancellor Portal के माध्यम से होने वाले नामांकन शुल्क और PM-USHA योजना के तहत खर्च की गई राशि की भी निष्पक्ष जांच की मांग उठाई गई है। आवेदन में कहा गया है कि इन योजनाओं और पोर्टल से जुड़े वित्तीय लेन-देन में पारदर्शिता सुनिश्चित की जानी चाहिए।
साथ ही यह भी आरोप लगाया गया कि पूर्व में वित्तीय अनियमितताओं के आरोप झेल चुके अधिकारियों को दोबारा महत्वपूर्ण प्रशासनिक जिम्मेदारियां दी गई हैं, जिससे विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
पुराने मामलों में कार्रवाई नहीं होने पर नाराजगी
छात्र नेता चन्दन सिंह ने प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि पूर्व कुलपति Mukul Narayan Dev के कार्यकाल में जिन अधिकारियों पर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगे थे और जिनके खिलाफ लाखों रुपये की वसूली का आदेश जारी हुआ था, उन मामलों में आज तक प्रभावी कार्रवाई नहीं होना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
इसके अलावा Mithlesh Singh की पदोन्नति से जुड़े मामले और Jharkhand University Act 2026 लागू होने के बाद कुलसचिव पद से संबंधित प्रशासनिक निर्णयों की भी निष्पक्ष जांच की मांग की गई है।
मूलभूत सुविधाओं के अभाव का आरोप
छात्र नेता ने विश्वविद्यालय परिसर में छात्रों के लिए बुनियादी सुविधाओं की कमी को भी गंभीर मुद्दा बताया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में स्वच्छ पेयजल, शौचालय, छात्रावास, वाई-फाई और कैंटीन जैसी सुविधाओं का अभाव है, जिससे छात्रों का शैक्षणिक माहौल प्रभावित हो रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यशैली के कारण उच्च शिक्षा व्यवस्था की छवि धूमिल हो रही है और छात्रों व शिक्षकों के हितों की लगातार अनदेखी की जा रही है।
निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो आंदोलन की चेतावनी
अंत में छात्र नेता चन्दन सिंह ने सरकार से मांग की कि विश्वविद्यालय के विगत दो वर्षों के प्रशासनिक एवं वित्तीय कार्यों की समयबद्ध, उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो छात्र मोर्चा लोकतांत्रिक आंदोलन करने को बाध्य होगा।
Author: Rashtriy Samachar
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