प्रेमिका संग सहमति से बने शारीरिक संबंध दुष्कर्म नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट।
महिला की याचिका खारिज, कोर्ट ने कहा– सहमति से बने संबंधों को रेप की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता।
प्रयागराज:इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में स्पष्ट किया है कि यदि पुरुष और महिला लंबे समय तक प्रेम संबंध में रहकर सहमति से शारीरिक संबंध बनाते हैं, तो उसे दुष्कर्म (रेप) की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता।महोबा जिले की महिला ने अपने सहकर्मी लेखपाल पर शादी का झांसा देकर रेप और ब्लैकमेलिंग का आरोप लगाया था। उसने दावा किया कि आरोपी ने पहले नशीला पदार्थ देकर संबंध बनाए, वीडियो बनाया और बाद में जातिगत ताने मारते हुए शादी से इंकार कर दिया।निचली अदालत ने महिला की याचिका पहले ही खारिज कर दी थी। महिला ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया, लेकिन जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल की बेंच ने सभी साक्ष्यों और परिस्थितियों पर गौर करने के बाद कहा कि—यदि महिला जानती थी कि सामाजिक या जातिगत कारणों से शादी संभव नहीं है,और इसके बावजूद उसने स्वेच्छा से लंबे समय तक संबंध बनाए,तो इसे दुष्कर्म नहीं माना जाएगा।हाईकोर्ट ने कहा कि केवल शादी का झांसा सहमति को अमान्य नहीं बनाता। जब तक यह साबित न हो कि संबंध धोखे या दबाव से बने हैं, तब तक उन्हें IPC की धारा 375 और 376 के तहत दुष्कर्म नहीं कहा जा सकता।यह फैसला भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण नजीर माना जा रहा है। अदालत ने साफ किया कि प्रेम संबंधों में बने सहमति वाले शारीरिक संबंधों को रेप का मामला नहीं माना जाएगा, भले ही बाद में शादी न हो पाई हो।



