हजारीबाग डिटेंशन सेंटर में महिला से दुष्कर्म का आरोप, तीन पुलिसकर्मियों पर FIR; तीनों निलंबित
हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान सामने आई बात, डालसा की सीलबंद रिपोर्ट में तीन पुलिसकर्मियों पर दुष्कर्म का उल्लेख
रांची/हजारीबाग। हजारीबाग डिटेंशन सेंटर में बंद एक महिला के साथ दुष्कर्म के मामले ने गंभीर रूप ले लिया है। मामले में तीन पुलिसकर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है और तीनों को निलंबित कर दिया गया है। यह जानकारी सोमवार को झारखंड हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से दी गई। वहीं, जिला विधिक सेवा प्राधिकार (DLSA/DALSA) की ओर से अदालत में पेश की गई सीलबंद रिपोर्ट में भी महिला के साथ तीन पुलिसकर्मियों द्वारा दुष्कर्म किए जाने का उल्लेख किया गया है।
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद की अध्यक्षता वाली खंडपीठ में हुई। दिन की दूसरी पाली में दोपहर 2:15 बजे हुई सुनवाई के दौरान सरकार ने अदालत को बताया कि महिला से दुष्कर्म के आरोप में तीन कांस्टेबल रंजीत महतो, रेणु बेंजामिन और वारिस कच्छप के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। तीनों को निलंबित भी कर दिया गया है।
FIR में धाराओं को लेकर कोर्ट ने पूछा सवाल
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने आरोपी पुलिसकर्मियों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी में आईपीसी की धाराएं लगाए जाने को लेकर भी राज्य सरकार से सवाल किया। इस पर राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता रोहित राय ने अदालत को बताया कि प्राथमिकी में आवश्यक संशोधन कर दिया जाएगा।
बताया गया कि निलंबित किए गए तीनों पुलिसकर्मी हजारीबाग के रहने वाले हैं। मामले की जांच और कानूनी कार्रवाई आगे जारी है।
डालसा की सीलबंद रिपोर्ट अदालत में पेश
महिला के साथ दुष्कर्म के आरोपों को लेकर DLSA/DALSA की सीलबंद रिपोर्ट भी अदालत के समक्ष प्रस्तुत की गई। रिपोर्ट में महिला के साथ तीन पुलिसकर्मियों द्वारा दुष्कर्म किए जाने की बात सामने आने का उल्लेख है।
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि डिटेंशन सेंटर में रहने के दौरान महिला को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं और उसकी जरूरतों का ध्यान रखा जाए।
2023 से बांग्लादेश भेजने के लिए केंद्र को पत्र
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि महिला को बांग्लादेश भेजने के संबंध में राज्य सरकार की ओर से वर्ष 2023 से केंद्र सरकार के विदेश मंत्रालय (Ministry of External Affairs) को लगातार पत्र भेजे जा रहे हैं। हालांकि, अब तक वहां से कोई जवाब प्राप्त नहीं हुआ है।
इस पर हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार की ओर से उपस्थित अधिवक्ता को इस मुद्दे पर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।
विदेशी अधिनियम के मामले को लेकर कोर्ट ने सरकार से पूछे सवाल
इससे पहले सोमवार सुबह हुई सुनवाई में अदालत ने महिला से जुड़े पुराने मामलों और उसे डिटेंशन सेंटर में रखे जाने को लेकर राज्य सरकार से कई सवाल किए।
कोर्ट ने मौखिक रूप से पूछा कि यदि महिला को वर्ष 2021 में विदेशी अधिनियम के मामले में दोषी ठहराकर तीन वर्ष की सजा दी गई थी, तो उसे उसी समय बांग्लादेश क्यों नहीं भेजा गया और उसे हजारीबाग डिटेंशन सेंटर में क्यों रखा गया?
अदालत ने यह भी सवाल किया कि महिला के खिलाफ वर्ष 2025 में दोबारा विदेशी अधिनियम के तहत मामला क्यों दर्ज किया गया और वर्ष 2026 में इस मामले में बरी होने के बाद सरकार की ओर से अपील क्यों नहीं की गई।
गृह सचिव ने बताया- बांग्लादेश सरकार से किया गया था संपर्क
कोर्ट में मौजूद गृह सचिव ने बताया कि वर्ष 2021 में सजा के बाद महिला को बांग्लादेश भेजने के लिए सरकार की ओर से बांग्लादेश सरकार से संपर्क किया गया था, लेकिन वहां से कोई जवाब नहीं मिला।
इसके बाद राज्य के महाधिवक्ता रोहित राय ने अदालत से कुछ समय देने का आग्रह किया और कहा कि वह सरकार से आवश्यक निर्देश लेना चाहते हैं। इस पर अदालत ने मामले की दोबारा दोपहर 2:15 बजे सुनवाई निर्धारित की।
2018 से शुरू हुआ महिला के खिलाफ मामलों का सिलसिला
सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि महिला के खिलाफ वर्ष 2018 में दो मामले दर्ज हुए थे। इनमें एक बच्चे के अपहरण से संबंधित और दूसरा विदेशी अधिनियम से जुड़ा मामला था। बच्चे से संबंधित मामले में उसे दो वर्ष की सजा हुई थी।
इसके बाद वर्ष 2021 में विदेशी अधिनियम के मामले में तीन वर्ष की सजा सुनाई गई। सजा पूरी होने के बाद उसे हजारीबाग डिटेंशन सेंटर भेजा गया था। बताया गया कि वह वर्ष 2025 के अंत में डिटेंशन सेंटर से चली गई थी। इसके बाद उसके खिलाफ विदेशी अधिनियम से संबंधित एक और मामला दर्ज किया गया, जिसमें वर्ष 2026 में उसे बरी कर दिया गया।
अब डिटेंशन सेंटर में उसके साथ दुष्कर्म के आरोप और उसे बांग्लादेश भेजे जाने में हो रही देरी का मामला हाईकोर्ट के समक्ष है।
मामले में अगली सुनवाई 15 अक्टूबर को निर्धारित की गई है। अदालत ने प्रार्थी को राज्य सरकार की ओर से दाखिल जवाब पर अपना प्रतिउत्तर देने को कहा है। प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता अंकित अपूर्वा ने पक्ष रखा।
Author: Ashish Yadav
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