JPSC नियुक्ति विवाद पर हाईकोर्ट में सुनवाई पूरी, फैसला सुरक्षित; सरकार के रद्दीकरण आदेश को चुनौती
रांची। झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की ओर से आयोजित 11वीं से 13वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा-2023, बाल विकास परियोजना पदाधिकारी (CDPO) और फूड सेफ्टी ऑफिसर की नियुक्ति रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सोमवार को झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं और राज्य सरकार को संक्षिप्त लिखित दलीलें (शॉर्ट नोट) दाखिल करने का निर्देश दिया है।
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति दीपक रोशन की अदालत में हुई। सुनवाई के दौरान हस्तक्षेपकर्ता और राज्य सरकार की ओर से अपना पक्ष रखा गया। हस्तक्षेपकर्ता की ओर से अधिवक्ता कुमार हर्ष ने परीक्षा में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसी TDPL के माध्यम से कथित तौर पर 50-50 लाख रुपये लेकर कई अभ्यर्थियों को पास कराया गया। ये आरोप सुनवाई के दौरान लगाए गए हैं।
सरकार ने अदालत में पेश की सीलबंद रिपोर्ट
राज्य सरकार की ओर से वरीय अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा और महाधिवक्ता रोहित राय ने अदालत में पक्ष रखा। सरकार की ओर से सीलबंद रिपोर्ट भी पेश की गई। सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने मामले में फैसला सुरक्षित रख लिया।
इससे पहले की सुनवाई में JPSC की ओर से परीक्षा में व्यवस्थित तरीके से अनियमितताएं होने की बात कही गई थी। आयोग की ओर से दलील दी गई थी कि जांच के दौरान परीक्षा की निष्पक्षता प्रभावित होने के संकेत मिले हैं। ऐसे में यह निर्धारित करना मुश्किल है कि सफल अभ्यर्थियों में कौन अनियमितताओं में शामिल था और कौन निर्दोष है।
JPSC की ओर से CID के दस्तावेजों का हवाला देते हुए नियुक्ति प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी होने की बात भी कही गई थी। आयोग का पक्ष था कि परीक्षा की निष्पक्षता प्रभावित होने की स्थिति में सरकार को नियुक्ति रद्द करने का अधिकार है।
तीन नियुक्तियों को रद्द करने के फैसले को चुनौती
यह मामला सिविल सेवा परीक्षा-2023 (विज्ञापन संख्या 01/2024), फूड सेफ्टी ऑफिसर (विज्ञापन संख्या 18/2023) और CDPO (विज्ञापन संख्या 21/2023) की नियुक्तियों से जुड़ा है। राज्य सरकार के नियुक्ति रद्द करने के आदेश को याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट में चुनौती दी है।
याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता अमृतांश वत्स और अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा ने पक्ष रखा। अब इस मामले में सभी की नजरें हाईकोर्ट के आने वाले फैसले पर टिकी हैं। अदालत का निर्णय इन नियुक्तियों से जुड़े विवाद की आगे की दिशा तय करेगा।
Author: Ashish Yadav
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