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मेडिकल कॉलेज में भी हुई है जैम पोर्टल से खरीदारी, जांच दोनों की होनी चाहिए : मनोज गुप्ता

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मेडिकल कॉलेज में भी हुई है जैम पोर्टल से खरीदारी, जांच दोनों की होनी चाहिए : मनोज गुप्ता

स्वास्थ्य विभाग में खरीदारी मामले की निष्पक्ष जांच की उठी मांग

हजारीबाग:स्वास्थ्य विभाग में जैम (GeM) पोर्टल से खरीदारी से जुड़े चर्चित मामले को लेकर सोशल एक्टिविस्ट मनोज गुप्ता ने निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है। बुधवार को दैनिक भास्कर कार्यालय पहुंचे मनोज गुप्ता ने बयान जारी करते हुए कहा कि 17 लाख रुपये की खरीदारी में मात्र 8 लाख रुपये का सामान प्राप्त होना और शेष राशि से जुड़े सवाल अत्यंत गंभीर हैं।

उन्होंने कहा कि मामले की जांच के नाम पर पर्दा डालने की कोशिश नहीं होनी चाहिए। यदि ऐसा हुआ तो आंदोलन के माध्यम से इसका विरोध किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जन स्वास्थ्य से जुड़े मामलों में किसी प्रकार का घोटाला बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

मनोज गुप्ता ने कहा कि जांच टीम की मॉनिटरिंग स्वयं सिविल सर्जन द्वारा की जा रही है, जबकि जैम पोर्टल से होने वाली खरीदारी के आदेश पर एनएचएम के प्रमुख होने के नाते उनके ही हस्ताक्षर होते हैं। इसके अलावा एनएचएम के जिला सांख्यिकी पदाधिकारी अनल कुजूर को जांच कमेटी में शामिल किए जाने पर भी उन्होंने सवाल उठाए। उनका कहना था कि खरीदारी एनएचएम के माध्यम से हुई है, ऐसे में निष्पक्षता को लेकर संदेह उत्पन्न होना स्वाभाविक है।

उन्होंने यह भी कहा कि आरसीएच पदाधिकारी एवं मलेरिया पदाधिकारी दोनों सिविल सर्जन के अधीन कार्यरत हैं, इसलिए उनसे पूरी तरह निष्पक्ष जांच की उम्मीद करना कठिन प्रतीत होता है।

मनोज गुप्ता ने मांग की कि यदि जिला प्रशासन पारदर्शिता बनाए रखना चाहता है तो उपायुक्त स्तर से ऐसी स्वतंत्र जांच समिति गठित की जाए, जिसका सीधा संबंध सिविल सर्जन कार्यालय से न हो।

उन्होंने आरोप लगाया कि जैम पोर्टल से खरीदारी केवल जिला स्वास्थ्य विभाग में ही नहीं, बल्कि मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भी बड़े स्तर पर हुई है। इसलिए वर्ष 2020 से अब तक मेडिकल College Hospital में हुई सभी खरीदारी की भी जांच होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि इस मामले के उजागर होने के बाद यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद मेडिकल कॉलेज अस्पताल अब तक पूरी तरह व्यवस्थित क्यों नहीं हो सका। डीएमएफटी फंड समेत विभिन्न मदों से सामग्री खरीदने और अस्पताल को विकसित करने की चर्चाएं लगातार होती रही हैं, लेकिन आज भी अस्पताल पूरी तरह विकसित होने के बजाय रेफरल अस्पताल की स्थिति में बना हुआ है।

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