जैम पोर्टल खरीद मामले की जांच पर उठे सवाल
सांसद मनीष जायसवाल बोले- जिन पर घोटाले का शक, वही कर रहे जांच
हजारीबाग:स्वास्थ्य विभाग में जैम (GeM) पोर्टल के माध्यम से हुई खरीदारी में कथित अनियमितता की जांच को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। मामले की जांच के लिए गठित चार सदस्यीय कमेटी की निष्पक्षता पर अब सवाल उठने लगे हैं। हजारीबाग सांसद मनीष जायसवाल ने जांच समिति की संरचना पर गंभीर आपत्ति जताते हुए कहा कि दूध की रखवाली की जिम्मेदारी बिल्ली को दे दी गई है।
सांसद ने आरोप लगाया कि जांच उन्हीं लोगों से कराई जा रही है, जो प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इस मामले से जुड़े हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि यह गंभीर मामला है और इसकी निष्पक्ष जांच जिला प्रशासन द्वारा स्वास्थ्य विभाग से बाहर की स्वतंत्र टीम से कराई जानी चाहिए।
सिविल सर्जन की भूमिका पर भी उठे सवाल
मनीष जायसवाल ने कहा कि जैम पोर्टल के माध्यम से सीएस कार्यालय से जारी होने वाले सभी ऑर्डर पर सिविल सर्जन के हस्ताक्षर होते हैं। साथ ही सामान की रिसीविंग भी सीएस कार्यालय के कर्मियों अथवा भंडारपाल द्वारा की जाती है। ऐसे में यदि सामान के बदले नकद भुगतान हुआ और एक वर्ष तक इसकी जानकारी नहीं हुई, तो यह सवाल खड़ा होना स्वाभाविक है।उन्होंने आशंका जताई कि जांच के नाम पर मामले को दबाने या घोटाले पर पर्दा डालने की कोशिश हो सकती है। सांसद ने उपायुक्त से मांग की कि वे अपनी निगरानी में स्वतंत्र जांच टीम गठित कर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराएं।
एनएचएम खरीद, फिर उसी विभाग के अधिकारी जांच में
जांच कमेटी की मॉनिटरिंग सिविल सर्जन डॉ. अशोक कुमार कर रहे हैं। कमेटी में जिला मलेरिया पदाधिकारी डॉ. कपिल मुनी प्रसाद, जिला आरसीएच पदाधिकारी डॉ. सुभाष प्रसाद एवं एनएचएम के जिला सांख्यिकी पदाधिकारी अनल कुजूर को शामिल किया गया है।सांसद ने विशेष रूप से अनल कुजूर को कमेटी में शामिल किए जाने पर सवाल उठाया। उनका कहना है कि स्वास्थ्य विभाग की अधिकांश गतिविधियां एनएचएम के माध्यम से संचालित होती हैं और संबंधित खरीदारी भी एनएचएम के जरिये ही हुई थी।
17 लाख की खरीद, 9 लाख की सामग्री गायब
मामला पिछले वर्ष मार्च में 17 लाख रुपये मूल्य के हेल्थ कार्ड एवं फाइल फोल्डर की खरीद से जुड़ा है। निरीक्षण के दौरान मात्र 8 लाख रुपये मूल्य का सामान ही उपलब्ध पाया गया, जबकि लगभग 9 लाख रुपये की सामग्री नहीं मिली।बताया गया कि जिला कुष्ठ निवारण पदाधिकारी डॉ. एस.के. राजन जब विभिन्न सीएचसी एवं पीएचसी के निरीक्षण पर पहुंचे, तब संबंधित स्वास्थ्य केंद्रों में हेल्थ कार्ड एवं फाइल फोल्डर नहीं मिले। पूछताछ में अधिकारियों ने बताया कि सामग्री की आपूर्ति ही नहीं की गई थी।
इधर सिविल सर्जन डॉ. अशोक कुमार ने आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जांच पूरी पारदर्शिता के साथ की जाएगी। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली से परिचित लोगों को ही जांच कमेटी में रखा गया है।उन्होंने कहा,बाहर की कमेटी क्यों बनाऊं? जिसे स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली की जानकारी नहीं हो, उसे स्टोर में क्यों घुसने दूं? एजेंसी अब भी सामान की आपूर्ति कर रही है। ऐसा लगता है कि सांसद को उन पर भरोसा नहीं है।
Author: Rashtriy Samachar
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