बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका में तथ्यों के छिपाए जाने की आशंका, हाईकोर्ट ने चतरा एसपी को जांच का दिया आदेश।

19 मार्च तक मांगी रिपोर्ट, अगली सुनवाई में याचिकाकर्ता समेत कई लोगों को कोर्ट में उपस्थित रहने का निर्देश.

रांची:बंदी प्रत्यक्षीकरण (हेबियस कॉर्पस) से संबंधित एक याचिका की सुनवाई करते हुए झारखंड हाईकोर्ट ने मामले में कुछ तथ्यों के छिपाए जाने की आशंका जताई है। अदालत ने चतरा के पुलिस अधीक्षक को पूरे मामले की जांच कर 19 मार्च 2026 तक रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। यह मामला अख्तरी खातून द्वारा दायर याचिका से जुड़ा है, जिसमें उनके बेटे के लापता होने की शिकायत की गई थी।मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद और न्यायमूर्ति दीपक रोशन की खंडपीठ ने की।सुनवाई के दौरान कोर्ट के निर्देश पर चतरा एसपी सुमित कुमार अग्रवाल अदालत में उपस्थित हुए।उन्होंने बताया कि इस मामले में टंडवा थाना प्रभारी अनिल उरांव और जांच अधिकारी अमित कुमार को विभागीय कार्रवाई के तहत निलंबित कर दिया गया है तथा उनके खिलाफ विभागीय कार्यवाही शुरू कर दी गई है।सुनवाई के दौरान टंडवा थाना के एक कांस्टेबल के पत्र का भी उल्लेख किया गया, जिसमें कहा गया था कि याचिकाकर्ता के बेटे को उसके मामा मोहम्मद गुलाम के हवाले कर दिया गया था, जो सिमरिया थाना क्षेत्र के निवासी हैं।अदालत में याचिकाकर्ता अख्तरी खातून ने बताया कि उनका बेटा 6 फरवरी 2026 को घर पहुंच गया था।इस दौरान मोहम्मद गुलाम भी अदालत में उपस्थित हुए और उन्होंने बताया कि याचिका दाखिल करते समय याचिकाकर्ता उनके साथ नहीं बल्कि अपने रिश्तेदार मोहम्मद अब्दुल हकीम के साथ आई थीं।वहीं पूर्व अधिवक्ता भास्कर त्रिवेदी ने भी इसकी पुष्टि की।कोर्ट ने सवाल उठाया कि यदि बेटे को 31 जनवरी 2026 को ही मोहम्मद गुलाम के हवाले कर दिया गया था, तो फिर 4 फरवरी 2026 को बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दाखिल करने की जरूरत क्यों पड़ी। इस पर मामले में कई बातें स्पष्ट नहीं हो सकीं।अदालत ने टिप्पणी की कि इस मामले में कुछ तथ्यों को छिपाए जाने की आशंका है।इन परिस्थितियों को देखते हुए कोर्ट ने चतरा एसपी को पूरे मामले की विस्तृत जांच कर 19 मार्च तक रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया है। साथ ही अगली सुनवाई के दिन अख्तरी खातून, मोहम्मद गुलाम और मोहम्मद अब्दुल हकीम को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होने का निर्देश दिया गया है।मामले की अगली सुनवाई 19 मार्च को होगी।

Author: Rashtriy Samachar
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