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अवैध खदान बनी मौत का फंदा: खावा जंगल में डूबे तीन मजदूर, 36 घंटे बाद भी लापता

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अवैध खदान बनी मौत का फंदा: खावा जंगल में डूबे तीन मजदूर, 36 घंटे बाद भी लापता

हज़ारीबाग:-हजारीबाग ज़िले के केरेडारी थाना अंतर्गत कंडाबेर व बारियातु सीमावर्ती क्षेत्र स्थित खावा जंगल में बुधवार दोपहर एक दर्दनाक हादसा हो गया। खावा नदी के किनारे संचालित एक अवैध कोयला खदान में काम कर रहे तीन लोग बाढ़ की चपेट में आकर खदान के भीतर डूब गए। 36 घंटे बीत जाने के बाद भी तीनों का कोई सुराग नहीं मिल सका है, जिससे परिजनों में कोहराम मचा है।डूबने वालों में कंडाबेर गांव निवासी प्रमोद साव (उम्र 45), उमेश कुमार साव (उम्र 25) और नौशाद आलम (उम्र 25) शामिल हैं। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, अचानक हुई तेज बारिश के कारण खावा नदी में बाढ़ आ गई, और पानी अवैध खदान के अंदर घुस गया। तीनों मजदूर खदान से मशीन निकालने के प्रयास में पानी की तेज़ धारा में बह गए।प्रमोद साव और नौशाद आलम खुद खदान के अवैध संचालक बताए जा रहे हैं, जबकि उमेश साव ट्रैक्टर चालक था, जो ईंट भट्ठों तक कोयला पहुँचाया करता था।

परिजनों का रो-रो कर बुरा हाल

तीनों लापता मजदूरों के घरों में मातम पसरा है। नौशाद की पत्नी अजमेरी खातून के चार छोटे बच्चे हैं। प्रमोद साव के दो बेटे और उमेश साव के एक बेटा है, जो अब अपने पिता की बाट जोह रहे हैं। परिजन लगातार मौके पर मौजूद हैं, लेकिन 36 घंटे बाद भी कोई ठोस जानकारी न मिलने से उनका सब्र टूट रहा है।

प्रशासनिक कार्रवाई पर उठ रहे है कई सवाल

घटना के बाद अंचल अधिकारी राम रतन वर्णवाल, बीडीओ विवेक कुमार एवं केरेडारी थाना प्रभारी घटनास्थल पर पहुंचे और राहत कार्य शुरू कराया, लेकिन अभी तक न कोई शव मिला है और न ही खदान संचालकों या जिम्मेदारों पर कोई कार्रवाई की गई है।स्थानीय लोगों का कहना है कि इस इलाके में कई अवैध खदानें प्रशासन की मिलीभगत से चल रही हैं, और पहले भी इस तरह की घटनाएं हो चुकी हैं, लेकिन कोई स्थायी कार्रवाई नहीं हुई।

क्या कहते हैं ग्रामीण

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि खनन माफिया लंबे समय से यहां सक्रिय हैं, और मजदूरों की सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं होते। न हेलमेट, न लाइफ जैकेट, न बीमा — मजदूरों की जान केवल कोयले के मुनाफे के सामने कुछ नहीं समझी जाती।

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Author: Rashtriy Samachar

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