हजारीबाग में मुठभेड़ में ढेर 1 करोड़ का इनामी नक्सली सहदेव सोरेन उर्फ प्रवेश दा

परिजनों का खुलासा – “10 साल पहले घर छोड़ गए थे, कोई संपर्क नहीं था”

हजारीबाग:झारखंड पुलिस और कोबरा 209 बटालियन को मंगलवार को बड़ी सफलता मिली। गोरहर थाना क्षेत्र के पातीपीरी जंगल में हुई मुठभेड़ में पुलिस ने तीन नक्सलियों को मार गिराया।
इनमें से एक भाकपा (माओवादी) की केंद्रीय कमेटी का सदस्य और झारखंड का कुख्यात नक्सली सहदेव सोरेन उर्फ प्रवेश दा था। उस पर सरकार ने एक करोड़ रुपये का इनाम घोषित कर रखा था।

पोस्टमार्टम के बाद परिजन पहुंचे शव लेने

मुठभेड़ के बाद सहदेव सोरेन का शव हजारीबाग शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल लाया गया। पोस्टमार्टम के बाद उसकी पत्नी पार्वती देवी, छोटा भाई टेकलाल सोरेन और दोनों बेटे शव लेने पहुंचे।इस दौरान बड़ा बेटा मनोज सोरेन भावुक होकर बोला
“हमें कभी पता नहीं था कि पापा नक्सली हैं। जब हम छोटे थे, तभी वे हमें छोड़कर चले गए थे। न वे घर आते थे, न ही कोई संपर्क रखते थे। असलियत तब पता चली जब पुलिस उन्हें खोजने घर आती थी।”
पत्नी और भाई ने बताई कहानी
पत्नी पार्वती देवी ने बताया –“करीब 10 साल पहले वे घर छोड़कर नक्सली संगठन से जुड़ गए थे। उसके बाद न लौटे और न ही कभी परिवार से बात की। हम लोग मजदूरी और खेती करके किसी तरह जीवन गुजारते हैं।”

भाई टेकलाल सोरेन ने कहा –“भाई संगठन में शामिल होकर कई बड़ी घटनाओं में शामिल रहा। हमें जानकारी पुलिस के माध्यम से मिलती थी। सरकार ने उस पर एक करोड़ का इनाम रखा था।”
साधारण परिवार, झोपड़ी जैसा घर
नक्सली संगठन में केंद्रीय कमेटी सदस्य रहने और करोड़ों की इनामी राशि घोषित होने के बावजूद सहदेव सोरेन का परिवार बेहद साधारण जीवन जी रहा है। पत्नी मजदूरी और खेती कर किसी तरह बच्चों की पढ़ाई व गुजारा करती है।

बड़ा बेटा मनोज (19) रांची में रहकर 12वीं की पढ़ाई कर रहा है जबकि छोटा बेटा गांव के स्कूल में 8वीं कक्षा में पढ़ता है। परिवार का घर आज भी झोपड़ीनुमा दो कमरे का है।
पुलिस का बयान
पुलिस अधिकारियों ने कहा कि इस मुठभेड़ से माओवादी संगठन को बड़ा झटका लगा है।
सहदेव सोरेन लंबे समय से झारखंड-बिहार सीमा पर सक्रिय था और नक्सली गतिविधियों को संचालित करता था।
Author: Rashtriy Samachar
खबर वही जो सबको रखे आगे











