हजारीबाग में ऑर्गेनिक ककड़ी की खेती से आत्मनिर्भर बने संतोष साव
बिहार की तर्ज पर खेती कर कमा रहे मुनाफा, स्थानीय किसानों को भी दे रहे रोजगार
हजारीबाग: जिले के कटकमदाग प्रखंड अंतर्गत सुल्ताना गांव के किसान संतोष साव ऑर्गेनिक खेती के जरिए आत्मनिर्भरता की मिसाल बन रहे हैं। पिछले कई वर्षों से वे जैविक खेती कर न केवल अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं, बल्कि स्थानीय किसानों को रोजगार और उन्नत खेती की तकनीक भी सिखा रहे हैं।
बढ़ती गर्मी के साथ खीरा, तरबूज और ककड़ी जैसी ठंडी तासीर वाली सब्जियों की मांग बाजार में तेजी से बढ़ी है। हजारीबाग में जहां पहले खीरा और तरबूज की खेती होती थी, वहीं संतोष साव ने पिछले तीन वर्षों से बिहार की तर्ज पर ऑर्गेनिक तरीके से ककड़ी की खेती शुरू की है। इससे उन्हें बेहतर उत्पादन और अच्छा लाभ मिल रहा है।आम तौर पर झारखंड में ककड़ी की खेती कम होती है, जिसके कारण बाजार में इसकी कीमत 60 से 100 रुपये प्रति किलो तक पहुंच जाती है। संतोष साव अपनी उपज को थोक बाजार में 25 से 30 रुपये प्रति किलो बेचते हैं, जिससे खुदरा बाजार में यह 40 से 50 रुपये प्रति किलो तक उपलब्ध हो पाती है। इससे उपभोक्ताओं को भी राहत मिल रही है।
संतोष साव अपने खेतों में विभिन्न प्रकार की ऑर्गेनिक खेती कर रहे हैं और आसपास के किसान भाइयों-बहनों को जोड़कर उन्हें आधुनिक खेती की तकनीक सिखा रहे हैं। उनके प्रयास से क्षेत्र में रोजगार के अवसर भी बढ़े हैं और किसान आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
Author: Rashtriy Samachar
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