रिम्स में हीमोफीलिया सेंटर बंद, मरीजों की बढ़ी परेशानी
हरमू अस्पताल में नए सेंटर की तैयारी, नॉन-फैक्टर इंजेक्शन से मिल रही राहत
रांची:झारखंड की राजधानी रांची को मेडिकल हब बनाने की बात भले ही सरकार कर रही हो, लेकिन जमीनी हकीकत अभी भी चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। राज्य के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल रिम्स में हीमोफीलिया ट्रीटमेंट सेंटर के बंद होने से मरीजों की परेशानी काफी बढ़ गई है।
पहले मरीजों को रिम्स में ही एक ही स्थान पर इलाज और जरूरी फैक्टर उपलब्ध हो जाता था, लेकिन सेंटर बंद होने के बाद अब उन्हें सदर अस्पताल और अन्य अस्पतालों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। इससे मरीजों को समय के साथ-साथ आर्थिक बोझ भी उठाना पड़ रहा है।
इस स्थिति को देखते हुए हीमोफीलिया सोसायटी ने हरमू अस्पताल में नया ट्रीटमेंट सेंटर खोलने की योजना बनाई है। प्रस्तावित सेंटर में पीडियाट्रिक, ऑर्थो, सर्जरी और फिजियोथेरेपी के विशेषज्ञ डॉक्टर उपलब्ध होंगे। सोसायटी के अनुसार, रांची में पूरे राज्य से मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं, ऐसे में एक अतिरिक्त सेंटर मरीजों और अस्पताल दोनों के लिए राहत साबित होगा।
वहीं, सरकार ने हीमोफीलिया मरीजों के इलाज के लिए बजट बढ़ाकर 35 करोड़ रुपये कर दिया है, जिससे बेहतर सुविधाओं की उम्मीद जताई जा रही है। इलाज के क्षेत्र में इमिसीजुमैब जैसे नॉन-फैक्टर इंजेक्शन भी कारगर साबित हो रहे हैं। इस इंजेक्शन के उपयोग से 30 से 35 दिनों तक इंटरनल ब्लीडिंग का खतरा कम हो जाता है, जिससे मरीजों को बार-बार फैक्टर लेने की जरूरत नहीं पड़ती।
फिलहाल, मरीजों को उम्मीद है कि जल्द ही स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार होगा और उन्हें बेहतर व सुलभ इलाज मिल सकेगा।
Author: Rashtriy Samachar
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