प्रेम विवाह से आहत पिता ने जीते-जी किया 18 वर्षीय बेटी का पिंडदान
चौपारण के पाण्डेयबारा-आरापगार की घटना: श्मशान घाट पर पिता, भाई और चाचा ने कराया मुंडन; गांव में चर्चा का विषय बनी घटना
चौपारण:-जिस बेटी को उंगली पकड़कर चलना सिखाया और बड़े अरमानों से पाला-पोसा, उसी बेटी के फैसले से आहत होकर एक पिता ने उसके जीते-जी उसका अंतिम संस्कार और श्राद्धकर्म कर दिया। मामला चौपारण थाना क्षेत्र के पाण्डेयबारा-आरापगार गांव का है, जहां गुरुवार को एक पिता ने अपनी 18 वर्षीय पुत्री का हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार श्मशान घाट पर पिंडदान किया। बेटी के प्रेम विवाह से दुखी पिता, भाई और चाचा ने सिर मुंडवाकर समाज के सामने अपना रोष व्यक्त किया और घोषणा की कि अब उनके लिए बेटी की मौत हो चुकी है।
घर से अचानक गायब हुई थी युवती
जानकारी के अनुसार, खेमन चंद्रवंशी की 18 वर्षीय पुत्री बीते दिनों अचानक घर से लापता हो गई थी। परिजनों ने अपने स्तर पर उसकी काफी खोजबीन की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। परिजनों ने चौपारण थाने में लिखित आवेदन देकर बेटी की बरामदगी की गुहार लगाई थी। इसी बीच परिवार को जानकारी मिली कि युवती ने पास के गांव नरैना निवासी पवन साव (पिता स्व. अशोक साव) के साथ प्रेम विवाह कर लिया है।
श्मशान घाट पर पूरी की गई श्राद्ध की रस्में
बेटी के प्रेम विवाह की खबर मिलते ही परिवार में गहरा आक्रोश और दुख फैल गया। पिता ने सामाजिक और पारिवारिक स्तर पर बेटी से हमेशा के लिए रिश्ता खत्म करने का फैसला लिया। इसके बाद गुरुवार को श्मशान घाट पर बाकायदा पंडित की मौजूदगी में पिंडदान और श्राद्धकर्म की सभी रस्में पूरी की गईं। मुंडन कराने के दौरान पिता की आंखों में गुस्से और बेबसी के आंसू साफ दिखाई दे रहे थे।
पीढ़ियों के टकराव और बिखरते रिश्तों की तस्वीर
इस घटना को लेकर इलाके में तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। श्मशान घाट पर कर्मकांड देखने के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण जुट गए।
बदलते सामाजिक ताने-बाने की झलक: एक ओर जहां 18 वर्षीय युवती ने बालिग होने के नाते अपने जीवनसाथी को चुनने का कानूनी अधिकार इस्तेमाल किया, वहीं दूसरी ओर पिता ने इसे कुल की मर्यादा के खिलाफ मानकर प्रतीकात्मक रूप से जीवित बेटी का अंतिम संस्कार कर दिया। यह घटना दो पीढ़ियों के विचारों में आते बदलाव और बिखरते पारिवारिक रिश्तों का एक दर्दनाक उदाहरण बन गई है।
Author: Ashish Yadav
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