एनटीपीसी की फ्लाई ऐश बनी ‘धीमा ज़हर’! बिना ढके दौड़ रहे राख लदे वाहनों से ग्रामीणों में आक्रोश
टंडवा समेत कई गांवों में उड़ रही जहरीली धूल, सांस की बीमारियां बढ़ने का दावा; पूर्व मुखिया ने की सख्त कार्रवाई की मांग
चतरा (टंडवा):- चतरा जिले के टंडवा प्रखंड स्थित एनटीपीसी पावर प्लांट से निकलने वाली फ्लाई ऐश के परिवहन को लेकर स्थानीय ग्रामीणों में भारी नाराजगी है। ग्रामीणों का आरोप है कि राख से लदे भारी वाहनों द्वारा पर्यावरणीय एवं सुरक्षा मानकों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है। अधिकांश वाहनों को निर्धारित नियमों के अनुसार पूरी तरह तिरपाल से नहीं ढका जा रहा, जिससे परिवहन के दौरान उड़ने वाली बारीक राख आसपास के गांवों में फैल रही है और लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
ग्रामीणों के अनुसार टंडवा, सेरनदाग, खधैया, मिश्रौल, धनगड्डा, राहम, नईपारम सहित कई गांवों से होकर रोजाना फ्लाई ऐश से लदे दर्जनों भारी वाहन गुजरते हैं। इन वाहनों से उड़ने वाली राख सड़क किनारे बसे घरों, खेतों और सार्वजनिक स्थलों तक पहुंच रही है। सड़कों पर धूल की मोटी परत जम जाती है, जिससे राहगीरों और वाहन चालकों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि लगातार उड़ रही फ्लाई ऐश के कारण क्षेत्र में खांसी, गले में जलन, आंखों में खुजली, एलर्जी, सांस लेने में तकलीफ और अस्थमा जैसी समस्याओं के मामले बढ़ रहे हैं। उनका दावा है कि बच्चे, बुजुर्ग और पहले से बीमार लोग सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं।
क्षेत्र के पूर्व मुखिया प्रयाग राम ने कहा कि यदि फ्लाई ऐश के परिवहन में पर्यावरणीय नियमों का सख्ती से पालन नहीं कराया गया, तो आने वाले समय में स्थिति और गंभीर हो सकती है। उन्होंने जिला प्रशासन, झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तथा एनटीपीसी प्रबंधन से मांग की कि बिना ढके फ्लाई ऐश का परिवहन करने वाले वाहनों पर तत्काल कार्रवाई की जाए। साथ ही सभी वाहनों को पूरी तरह तिरपाल से ढककर चलाने और प्रभावित सड़कों पर नियमित रूप से पानी का छिड़काव कराने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि प्रदूषण पर नियंत्रण पाया जा सके।
फिलहाल इस मामले में एनटीपीसी प्रबंधन या संबंधित अधिकारियों की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। उनका पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।


