Ranchi Court News: JPSC नियुक्तियों पर रोक, चयनित अभ्यर्थियों को वापस काम पर लेने का हाईकोर्ट का आदेश
11वीं से 13वीं सिविल सेवा और फूड सेफ्टी ऑफिसर नियुक्ति रद्द करने के सरकार के फैसले को चुनौती; हाईकोर्ट ने कहा—नैसर्गिक न्याय के तहत बिना उचित प्रक्रिया के नहीं हटाया जा सकता
रांची:-झारखंड सरकार की ओर से अधिसूचना जारी कर विभिन्न नियुक्तियों को रद्द करने के आदेश को चुनौती देने वाली तीन अलग-अलग याचिकाओं पर गुरुवार को झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। न्यायमूर्ति दीपक रौशन की अदालत ने जेपीएससी की 11वीं से 13वीं सिविल सेवा परीक्षा और फूड सेफ्टी ऑफिसर नियुक्ति को रद्द करने के सरकार के आदेश पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है।
कोर्ट ने चयनित अभ्यर्थियों को वापस काम पर लेने का भी आदेश दिया है। अदालत ने टिप्पणी की कि नैसर्गिक न्याय के सिद्धांत के तहत उचित कानूनी प्रक्रिया अपनाए बिना नियुक्त कर्मियों को हटाया नहीं जा सकता। कोर्ट ने राज्य सरकार से इस मामले में 15 सितंबर तक जवाब दाखिल करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को होगी।
तीन याचिकाओं पर हुई सुनवाई
मामले में दो अलग-अलग याचिकाओं में दीपमाला एवं अन्य तथा सोनम कुमारी ने सरकार की उस अधिसूचना को चुनौती दी है, जिसमें जेपीएससी की 11वीं से 13वीं सिविल सेवा परीक्षा, विज्ञापन संख्या 01/2024, को रद्द करने का आदेश दिया गया है।
वहीं, तीसरी याचिका में सौरव सिंह एवं अन्य ने जेपीएससी द्वारा आयोजित फूड सेफ्टी ऑफिसर परीक्षा, विज्ञापन संख्या 18/2023, के आधार पर हुई नियुक्तियों को रद्द करने के सरकारी फैसले को चुनौती दी है।
दूसरे जगह की नौकरी छोड़कर की थी ज्वाइनिंग
याचिकाकर्ता सोनम कुमारी की ओर से अदालत को बताया गया कि उन्होंने दूसरी जगह की नौकरी छोड़कर जेपीएससी के माध्यम से मिली नौकरी ज्वाइन की थी। उन्हें 24 नवंबर 2025 को नियुक्ति पत्र मिला था और उन्होंने प्रशिक्षण भी पूरा किया था।
याचिका में कहा गया है कि इसी बीच राज्य सरकार ने 18 अगस्त की देर रात अधिसूचना जारी कर नियुक्ति रद्द करने का निर्णय लिया। याचिकाकर्ता की ओर से कोर्ट से सरकार के इस आदेश को निरस्त करने का आग्रह किया गया।
CID जांच के बाद सरकार ने लिया था फैसला
गौरतलब है कि CID जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर राज्य सरकार ने 18 अगस्त की देर रात उन परीक्षाओं को रद्द करने की घोषणा की थी, जिनमें TDPL की भूमिका सामने आने की बात कही गई थी। सरकार ने वर्ष 2014 से आयोजित विभिन्न नियुक्ति परीक्षाओं में संभावित अनियमितताओं की जांच कराने की भी घोषणा की थी।
इसके बाद कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग की ओर से परीक्षाओं को रद्द करने, परीक्षा प्रक्रिया स्थगित करने और जांच के दायरे में लाने से संबंधित अधिसूचना जारी की गई।
अधिसूचना के अनुसार 22 परीक्षाओं को रद्द, 6 परीक्षाओं की प्रक्रिया स्थगित और 17 परीक्षाओं को जांच के दायरे में रखने का उल्लेख किया गया है।
15 सितंबर को फिर होगी सुनवाई
याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा, अमृतांश वत्स और पीएएस पति ने अदालत के समक्ष पक्ष रखा। हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद अब मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को होगी। तब राज्य सरकार की ओर से अपना जवाब दाखिल किया जाएगा।
Author: Ashish Yadav
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