हाईकोर्ट के स्टेटस आदेश के बीच जमीनदोज हुआ पुराना भवन, जांच में पहुंचे सदर सीओ व एसडीपीओ
योगेंद्र साव ने किया जमीन पर दावा, वार्ड पार्षद, उपमहापौर ने उठाया मोहल्ले की समस्याओं का मुद्दा
हजारीबाग : हजारीबाग में खास महल जमीन को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। रविवार होने के बावजूद सदर अंचलाधिकारी आशुतोष कुमार व सदर एसडीपीओ रूपक कुमार पुलिस बल के साथ विवादित स्थल पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। मौके पर पूर्व मंत्री योगेंद्र साव, वार्ड पार्षद विकास यादव, उपमहापौर अविनाश यादव, वार्ड पार्षद कैलाश साव समेत बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौजूद थे। जमीन पर हुए निर्माण, पुराने भवन को जमीनदोज किए जाने, पेड़ काटने व पानी निकासी के रास्ते को लेकर अधिकारियों तथा स्थानीय लोगों के बीच तीखी बहस हुई। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि जमीन पर विवाद व न्यायालय के अंतरिम आदेश के बावजूद सामने की ओर करीब नौ फीट ऊंची दीवार खड़ी कर दी गई। पीछे की तरफ गैर-मजरुआ जमीन पर नाली निकालने के लिए गतिविधियां की गईं तथा पेड़ काटे गए। लोगों ने लघु सिंचाई विभाग के पुराने कार्यालय को भी जमीनदोज किए जाने पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि जमीन की स्थिति स्पष्ट होने तक किसी भी तरह की कार्रवाई नहीं होनी चाहिए। सदर एसडीपीओ रूपक कुमार ने बताया कि बड़ा बाजार थाना व सदर अंचलाधिकारी के माध्यम से सूचना मिली थी कि मुजीबुर रहमान बनाम झारखंड राज्य मामले में झारखंड हाईकोर्ट में वाद चल रहा है तथा इसमें न्यायालय का अंतरिम आदेश यथास्थिति बनाए रखने के संबंध में है। उन्होंने कहा कि आदेश के तहत जमीन पर किसी प्रकार का निर्माण कार्य नहीं कराया जाना है। एसडीपीओ के अनुसार, पुलिस को सूचना मिली थी कि वहां मौजूद सरकारी संपत्ति व पुराने भवन को तोड़ा जा रहा है। इसी सूचना के आधार पर पुलिस प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची। उन्होंने कहा कि पहले वहां एक खंडहरनुमा भवन था, जो अब दिखाई नहीं दे रहा है। इस संबंध में आवेदन मिलने पर सुसंगत धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर आगे की जांच व कार्रवाई की जाएगी।
*योगेंद्र साव ने मौखिक रूप से किया जमीन पर दावा
मौके पर पहुंचे पूर्व मंत्री योगेंद्र साव ने जमीन पर मौखिक रूप से अपना दावा पेश किया। उन्होंने कहा कि जमीन उनकी है और वे अपनी जमीन पर काम करा रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि उनकी जमीन पर काम करने को लेकर बार-बार विवाद क्यों खड़ा किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि उनके परिवार में शादी का कार्यक्रम है तथा उसी को लेकर वहां काम कराया जा रहा है। योगेंद्र साव ने वार्ड पार्षद विकास यादव पर स्थानीय लोगों को बहकाने तथा विवाद पैदा करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि इस मामले में उन्होंने थाना व पुलिस अधीक्षक को लिखित शिकायत भी दी है। हालांकि, मौके पर उनके दावे के समर्थन में दस्तावेज प्रस्तुत किए जाने की पुष्टि नहीं हुई है। जमीन के मालिकाना हक का अंतिम निर्धारण संबंधित दस्तावेजों व न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर होना है।
*विकास यादव व अविनाश यादव ने उठाया स्थानीय लोगों की परेशानी का मुद्दा*
विवादित स्थल पर वार्ड पार्षद विकास यादव व उपमहापौर अविनाश यादव स्थानीय लोगों के समर्थन में पहुंचे। मौके पर लोगों ने आशंका जताई कि यदि जमीन के इस हिस्से से पानी की निकासी प्रभावित होती है, तो आसपास के मोहल्लों में जलजमाव की समस्या पैदा हो सकती है। स्थानीय लोगों की ओर से पानी निकासी का रास्ता सुरक्षित रखने तथा स्थानीय लोगों की समस्याओं पर ध्यान देने की बात रखी। लोगों का कहना था कि जमीन के उपयोग में बदलाव से पहले यह स्पष्ट होना चाहिए कि वहां से मोहल्ले का पानी निकलता है या नहीं। उपमहापौर अविनाश यादव की ओर से यह बात उठाई गई कि यदि यह स्थान पानी निकासी का रास्ता रहा है और इसके बंद होने से जलजमाव की समस्या पैदा होती है, तो मोहल्लेवासी नगर निगम में शिकायत करेंगे। नगर निगम के स्तर पर जलनिकासी से जुड़ी समस्या की जांच कराना जरूरी होगा, ताकि स्थानीय लोगों को परेशानी का सामना न करना पड़े।
*घर उजड़ने की आशंका से परेशान दिखे स्थानीय लोग*
मौके पर जुटे स्थानीय लोगों ने जमीन को लेकर चल रही कार्रवाई पर विरोध जताया। एक महिला बच्चे को गोद में लेकर अधिकारियों के सामने अपनी परेशानी बताती दिखी। महिला ने कहा कि यदि उनका घर हटाया गया, तो उनके सामने रहने का संकट खड़ा हो जाएगा। कुछ स्थानीय लोगों ने दावा किया कि उनके परिवार कई पीढ़ियों से वहां रह रहे हैं तथा उनके पास रहने के लिए दूसरी जगह नहीं है। कुछ लोगों ने सवाल उठाया कि यदि जमीन सरकारी है, तो उसका उपयोग सार्वजनिक हित में होना चाहिए। स्थानीय लोगों के एक वर्ग ने विवादित स्थल पर पार्क विकसित करने की मांग भी की। वहीं, जमीन पर दावा करने वाले पक्ष और स्थानीय निवासियों के बीच अधिकार को लेकर बहस जारी रही।
पैमाइश के बाद स्पष्ट होगी स्थिति: अंचल अधिकारी
सदर अंचलाधिकारी आशुतोष कुमार ने कहा कि जमीन की पैमाइश के बाद ही उसकी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी। खास महल जमीन के कुछ हिस्सों से जुड़े दस्तावेजों और पुनर्विचार की प्रक्रिया का मामला भी सामने आया। चूंकि मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन है, इसलिए जमीन की स्थिति व आगे की कार्रवाई न्यायालय के आदेश तथा उपलब्ध दस्तावेजों के आलोक में देखी जाएगी। फिलहाल जमीन के अलग-अलग हिस्सों की स्थिति, पुराने भवन को तोड़े जाने, पेड़ काटे जाने व पानी निकासी के रास्ते को लेकर उठे सवालों की जांच महत्वपूर्ण है। एसडीपीओ ने आवेदन मिलने पर कानूनी कार्रवाई की बात कही है। वहीं, स्थानीय लोगों की ओर से जलनिकासी की समस्या को नगर निगम के समक्ष उठाने की बात सामने आई है। अब निगाह जमीन की पैमाइश, न्यायालय के अंतरिम आदेश के पालन और विवादित स्थल पर हुई गतिविधियों की जांच पर टिकी है।
Author: Ashish Yadav
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