Chatra News: स्वास्थ्य उपकेंद्र के टेंडर में गड़बड़ी का आरोप, बैकडेट से वर्क ऑर्डर जारी करने का मामला आया सामने
चतरा। जिले के टंडवा प्रखंड की नवाडीह पंचायत में स्वास्थ्य उपकेंद्र निर्माण के टेंडर को लेकर कथित अनियमितता का मामला सामने आया है। टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ी की शिकायत के बाद संबंधित इंजीनियर द्वारा कथित तौर पर बैकडेट से वर्क ऑर्डर जारी किए जाने का आरोप लगा है। हालांकि, वर्क ऑर्डर पर दर्ज डिजिटल हस्ताक्षर की तारीख ने पूरे मामले पर सवाल खड़े कर दिए हैं। दस्तावेज के अनुसार, वर्क ऑर्डर पर 18 अप्रैल 2026 की तारीख अंकित है, जबकि डिजिटल हस्ताक्षर की तारीख 15 अक्टूबर 2026 दर्ज है।
दिसंबर 2025 में निकाला गया था टेंडर
मिली जानकारी के अनुसार, नवाडीह पंचायत में स्वास्थ्य उपकेंद्र के निर्माण के लिए 15 दिसंबर 2025 को टेंडर निकाला गया था। इसमें अनुज कंस्ट्रक्शन, नागेंद्र कुमार साहू और सुमन कुमारी ने भाग लिया था। 26 दिसंबर 2025 को टेंडर का तकनीकी बिड खोला गया। इसके बाद 8 जनवरी 2026 को तकनीकी बिड के मूल्यांकन के दौरान अनुज कंस्ट्रक्शन को अयोग्य घोषित कर दिया गया।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि इसके बाद टेंडर प्रक्रिया को लेकर अनियमितताएं शुरू हुईं। तकनीकी बिड खुलने के करीब पांच महीने बाद वित्तीय बिड खोला गया। 10 जून 2026 को वित्तीय बिड के मूल्यांकन के बाद नागेंद्र कुमार साहू को एल-1 यानी सबसे कम बोली लगाने वाला सफल निविदादाता घोषित किया गया।
एल-1 घोषित होने से पहले निर्माण शुरू करने का आरोप
मामले में सबसे गंभीर सवाल निर्माण कार्य शुरू करने की तारीख को लेकर उठाए गए हैं। आरोप है कि नागेंद्र कुमार साहू ने एल-1 घोषित होने से पहले ही स्वास्थ्य उपकेंद्र का निर्माण कार्य शुरू कर दिया था। इस पर स्थानीय ग्रामीणों ने आपत्ति जताई।
ग्रामीणों के अनुसार, जिस जमीन पर स्वास्थ्य उपकेंद्र का निर्माण कराया जा रहा था, उस पर वर्ष 1956 से किसी अन्य व्यक्ति का अधिकार बताया जा रहा है। संबंधित जमीन का लगान भी कटने की बात कही गई है। ऐसे में निर्माण कार्य को लेकर भूमि के स्वामित्व और वैधता पर भी सवाल उठे हैं।
शिकायत के बाद बैकडेट से वर्क ऑर्डर जारी करने का आरोप
स्वास्थ्य उपकेंद्र के टेंडर में कथित गड़बड़ी को लेकर ग्रामीण विकास विभाग और जिले के उपायुक्त से शिकायत की गई थी। शिकायत के बाद संबंधित इंजीनियर द्वारा नागेंद्र कुमार साहू के नाम से वर्क ऑर्डर जारी किए जाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया।
आरोप है कि वर्क ऑर्डर पर 18 अप्रैल 2026 की तारीख अंकित की गई, जबकि उस पर डिजिटल हस्ताक्षर 15 अक्टूबर 2026 को किए जाने का विवरण दर्ज है। इसी तारीख के अंतर के आधार पर वर्क ऑर्डर को बैकडेट से जारी किए जाने की आशंका जताई जा रही है।
जांच के बाद स्पष्ट होगी वास्तविक स्थिति
इस पूरे मामले में टेंडर प्रक्रिया, वित्तीय बिड खोलने में हुई देरी, निर्माण कार्य शुरू करने की समय-सीमा, जमीन के स्वामित्व और वर्क ऑर्डर पर दर्ज तारीखों की निष्पक्ष जांच महत्वपूर्ण है। यदि आरोपों की पुष्टि होती है, तो संबंधित अधिकारियों और अन्य जिम्मेदार लोगों की भूमिका की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
फिलहाल, संबंधित विभाग और जिला प्रशासन की ओर से इस मामले में आधिकारिक जांच के निष्कर्ष या पक्ष की जानकारी सामने आने पर ही आरोपों की वास्तविकता स्पष्ट हो सकेगी।
Author: Ashish Yadav
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