वन अधिकारियों पर FIR के मामले में सदर पुलिस को कोर्ट का रिमाइंडर
सीजीएम कोर्ट ने पूर्व आदेश के अनुपालन पर मांगी रिपोर्ट, नहीं हुई कार्रवाई तो कारण बताने का निर्देश; 28 सितंबर को अगली सुनवाई
हजारीबाग:- वन विभाग के अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने से जुड़े मामले में हजारीबाग के सीजीएम न्यायालय ने सदर थाना पुलिस को रिमाइंडर भेजा है। अदालत ने पुलिस से जानना चाहा है कि पूर्व में दिए गए आदेश का अनुपालन हुआ है या नहीं। यदि आदेश का अनुपालन नहीं हुआ है तो इसके पीछे का कारण बताने का निर्देश दिया गया है। मामले की अगली सुनवाई 28 सितंबर को निर्धारित की गई है।
मामला हजारीबाग वन विभाग के अधिकारियों के खिलाफ दायर परिवाद वाद से जुड़ा है। इससे पहले अदालत ने परिवाद पर सुनवाई करते हुए 24 अप्रैल को पुलिस से रिपोर्ट मांगी थी। आरोप है कि निर्धारित आदेश के बावजूद पुलिस की ओर से अब तक न्यायालय के आदेश का अनुपालन नहीं किया गया। इसके बाद अदालत ने 3 सितंबर को सदर पुलिस को रिमाइंडर जारी किया।
वन अधिकारियों पर गंभीर आरोप
मामले में क्षेत्रीय वन अधिकारी रविंद्र नाथ मिश्रा पर कथित अवैध खनन से जुड़े दोषियों को बचाने और गलत रिपोर्ट तैयार करने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। शिकायतकर्ता का दावा है कि मामले की सीआईडी जांच में भी आरोपों की पुष्टि हुई थी। इसके बाद प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए बड़ी बाजार ओपी में शिकायत दी गई, लेकिन कथित तौर पर प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि रविंद्र नाथ मिश्रा ने अपने अधीनस्थ अधिकारी डीएफओ मौन प्रकाश से अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों की एकतरफा जांच कराई और संबंधित रिपोर्ट बड़ी बाजार ओपी प्रभारी को उपलब्ध कराई।
पुलिस रिपोर्ट की प्रक्रिया पर भी सवाल
शिकायतकर्ता के अनुसार, बड़ी बाजार ओपी प्रभारी द्वारा मामले की जांच के लिए वन विभाग को पत्र भेजे जाने की बात कही गई, लेकिन शिकायत में यह सवाल उठाया गया है कि यह पत्र किस पत्रांक के तहत भेजा गया था और मुख्य आरोपी ने किस पत्र के जवाब में अपने खिलाफ जांच रिपोर्ट तैयार कराकर पुलिस को सौंपी।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि यह पूरी प्रक्रिया एफआईआर दर्ज किए बिना आगे बढ़ाई गई। इसी आधार पर पुलिस की कार्रवाई और जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए हैं।
सीजीएम कोर्ट में परिवाद दायर
मामले को लेकर बड़कागांव निवासी एवं पर्यावरण कार्यकर्ता शनिकांत उर्फ मंटू सोनी ने हजारीबाग सीजीएम न्यायालय में परिवाद वाद संख्या 1018/2016 दायर किया है। परिवाद में पुलिस अधिकारियों पर न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने तथा आरोपियों के साथ कथित मिलीभगत कर विभाग को भ्रामक रिपोर्ट भेजने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
शिकायत में वन विभाग के अधिकारी रविंद्र नाथ मिश्रा, डीएफओ पश्चिमी मौन प्रकाश, पूर्व पीसीसीएफ अशोक कुमार सहित कुल सात लोगों को आरोपी बनाया गया है।
पुलिस अधिकारियों पर भी लगाए आरोप
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि बड़ी बाजार ओपी प्रभारी पंकज कुमार और सदर SDPO ने मामले के महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाते हुए कथित तौर पर “भ्रामक एवं पूर्वाग्रहग्रस्त” रिपोर्ट वरीय अधिकारियों को भेजी। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि आवेदन के साथ दिए गए महत्वपूर्ण दस्तावेजों और अनुलग्नकों को नजरअंदाज कर तकनीकी आधार पर प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई।
मामले में अधिवक्ता पवन कुमार यादव और प्रवीण प्रकाश ने अदालत में शिकायतकर्ता का पक्ष रखा। इसके बाद न्यायालय ने पुलिस से रिपोर्ट मांगी है। अब अदालत के रिमाइंडर के बाद पुलिस को पूर्व आदेश के अनुपालन की स्थिति स्पष्ट करनी होगी।
मामले में लगाए गए आरोपों पर संबंधित वन अधिकारियों और पुलिस पदाधिकारियों का पक्ष उपलब्ध नहीं है। उनका पक्ष सामने आने पर खबर में शामिल किया जायेगा ।
Author: Ashish Yadav
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