सुप्रीम कोर्ट ने छात्र आंदोलनों से जुड़ी कई FIR पर लगाई रोक, CJP ने दिल्ली मार्च लिया वापस
केंद्र के आश्वासन के बाद 5 सितंबर का प्रस्तावित दिल्ली मार्च रद्द; गंभीर आपराधिक मामलों में कानूनी प्रक्रिया रहेगी जारी
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने जुलाई में नीट-यूजी पेपर लीक के विरोध में हुए छात्र आंदोलनों से संबंधित एफआईआर को लेकर बड़ा आदेश दिया है। अदालत ने दिल्ली, बिहार, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और असम समेत विभिन्न राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों में 20 से 25 जुलाई के बीच हुए प्रदर्शनों से संबंधित एफआईआर को आगे नहीं बढ़ाने और उनकी जांच रोकने का निर्देश दिया है। हालांकि, हत्या, बलात्कार, अपहरण जैसे गंभीर आपराधिक आरोपों वाले मामलों को इस राहत से बाहर रखा गया है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने 5 सितंबर को दिल्ली में प्रस्तावित विरोध मार्च का आह्वान वापस ले लिया है। संगठन की ओर से कहा गया कि केंद्र सरकार से मिले सकारात्मक आश्वासनों को देखते हुए प्रस्तावित मार्च को वापस लेना उचित है।
केंद्र ने दिए तीन प्रमुख आश्वासन
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने केंद्र सरकार की ओर से अदालत को बताया कि सरकार 25 जुलाई को प्रदर्शनकारी संगठन के प्रतिनिधियों के साथ हुई बैठक में दिए गए आश्वासनों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है।
इनमें 20 से 25 जुलाई के बीच प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर को वापस लेना, उन्हीं घटनाओं के संबंध में नई एफआईआर दर्ज नहीं करना तथा नीट अभ्यर्थियों और आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा देने संबंधी आश्वासन शामिल हैं।
गंभीर आपराधिक मामलों में कार्रवाई जारी रहेगी
केंद्र सरकार ने अदालत से ऐसे मामलों में कार्रवाई की अनुमति मांगी, जिनमें गंभीर एवं संगीन आपराधिक आरोप या आपराधिक इतिहास सामने आया है। दिल्ली पुलिस की ओर से ऐसे 2,837 लोगों का उल्लेख किया गया, जिनके बारे में पुलिस ने आपराधिक रिकॉर्ड होने और प्रदर्शन स्थल पर मौजूद रहने की बात कही है।
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि गंभीर अपराधों से जुड़े मामलों पर नियमित कानूनी प्रक्रिया जारी रह सकती है। हालांकि, इन मामलों का अपवाद बाकी प्रदर्शनकारियों को दी गई व्यापक राहत को प्रभावित नहीं करेगा।
नई FIR दर्ज नहीं करने का निर्देश
अदालत ने निर्देश दिया कि 20 से 25 जुलाई के बीच हुए प्रदर्शनों से संबंधित जिन एफआईआर को आदेश के दायरे में रखा गया है, उन्हें आगे नहीं चलाया जाएगा और न ही उनकी जांच जारी रखी जाएगी। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि उसी घटना के संबंध में नई एफआईआर दर्ज नहीं की जाएगी।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आदेश का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि केवल प्रदर्शन में भाग लेने के कारण छात्रों और युवाओं को आपराधिक मामलों के चलते भविष्य में नुकसान न उठाना पड़े। हालांकि, गंभीर आपराधिक अपराधों में संलिप्तता के आरोपों की कानूनी प्रक्रिया जारी रह सकती है।
दिल्ली पुलिस ने भी दाखिल की थी याचिका
इससे पहले दिल्ली पुलिस ने जनहित और राष्ट्रीय हित का हवाला देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। पुलिस ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अदालत की विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए छात्रों के खिलाफ दर्ज एफआईआर को समाप्त करने का आग्रह किया था।
सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ मामले की सुनवाई कर रही थी। पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना भी शामिल थे।
5 सितंबर का दिल्ली मार्च वापस
सुनवाई के दौरान सीजेपी के प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से मिले सकारात्मक आश्वासनों को देखते हुए संगठन के लिए 5 सितंबर को प्रस्तावित दिल्ली मार्च का आह्वान वापस लेना उचित है। इसके साथ ही संगठन ने प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन को रद्द करने की घोषणा कर दी।
सुप्रीम कोर्ट सीजेपी के नेतृत्व में 20 जुलाई को संसद की ओर निकाले गए मार्च के दौरान सुरक्षा बलों द्वारा कथित कार्रवाई से संबंधित याचिकाओं पर भी सुनवाई कर रहा है। प्रदर्शन के दौरान पुलिस और सुरक्षा बलों द्वारा प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए बल प्रयोग किए जाने के आरोप लगाए गए थे।
हालांकि, पूरे मामले में अलग-अलग पक्षों की ओर से किए गए दावों और आरोपों की अंतिम स्थिति संबंधित न्यायिक प्रक्रिया एवं आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर ही स्पष्ट होगी।
Author: Ashish Yadav
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