टंडवा फायरिंग कांड का पुलिस ने किया खुलासा, राहुल दुबे गैंग से जुड़े दो आरोपी गिरफ्तार; एक को जवाबी कार्रवाई में लगी गोली
चंद्रगुप्त कोल माइंस के सिक्योरिटी ऑफिस में दहशत फैलाने और रंगदारी के आरोप में कार्रवाई, तीन अन्य आरोपियों की तलाश जारी
चतरा। टंडवा थाना क्षेत्र के उर्दू गोड़ स्थित सुश्री चंद्रगुप्त कोल माइन प्राइवेट लिमिटेड के सिक्योरिटी ऑफिस में 23 अगस्त को हुई फायरिंग के मामले में चतरा पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, घटना का उद्देश्य दहशत फैलाना और रंगदारी मांगना था।
घटना के बाद पुलिस अधीक्षक चतरा के निर्देश पर अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी टंडवा के नेतृत्व में विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया। टीम ने तकनीकी साक्ष्यों और मानवीय सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए 24 अगस्त को रांची के एयरपोर्ट थाना क्षेत्र से सटे मैदान के पास से दो संदिग्धों को पकड़ा।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान विकास कुमार सिंह, निवासी सचिवालय कॉलोनी, डोरंडा, रांची और स्वराज ठाकुर, निवासी असधी, थाना कटकमसांडी, हजारीबाग, वर्तमान पता भवानीपुर, डोरंडा, रांची के रूप में हुई है।
मोबाइल की जांच में मिले महत्वपूर्ण साक्ष्य
पुलिस के मुताबिक, आरोपियों के पास से बरामद मोबाइल फोन की जांच और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर इस घटना में उनकी कथित संलिप्तता से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए। पुलिस का दावा है कि पूछताछ के दौरान दोनों ने घटना में अपनी भूमिका स्वीकार की और तीन अन्य आरोपियों के नाम भी बताए।
पुलिस के अनुसार, घटना के बाद गिरोह के सरगना बताए जा रहे राहुल दुबे की ओर से स्वराज ठाकुर के बैंक खाते में 50 हजार रुपये मंगाए जाने की जानकारी भी जांच में सामने आई है।पुलिस ने दोनों आरोपियों को विधिवत गिरफ्तार कर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।
हथियार बरामदगी के दौरान पुलिस की जवाबी कार्रवाई
पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी विकास कुमार सिंह ने पूछताछ में बताया कि घटना में इस्तेमाल हथियार को 23 अगस्त को वारदात के बाद भागने के दौरान रास्ते में छिपा दिया गया था।हथियार की बरामदगी के लिए SIT टीम उसे बताए गए स्थान पर ले जा रही थी। पुलिस का आरोप है कि इसी दौरान विकास कुमार सिंह ने एक पुलिस पदाधिकारी की कमर से पिस्टल छीनकर फायरिंग करते हुए भागने का प्रयास किया।पुलिस के अनुसार, स्थिति को नियंत्रित करने और हथियार की सुरक्षा के लिए चेतावनी देने के बाद SIT टीम ने जवाबी फायरिंग की, जिसमें विकास कुमार सिंह के पैर में गोली लगी। उसे तत्काल NTPC अस्पताल, टंडवा ले जाया गया, जहां से बेहतर इलाज के लिए हजारीबाग रेफर किया गया।
पुलिस ने विकास को बताया शूटर
पुलिस के अनुसार, जांच में विकास कुमार सिंह की भूमिका शूटर के रूप में सामने आई है। पुलिस का दावा है कि विकास और उसके सहयोगी ने ही उर्दू मोड़ स्थित चंद्रगुप्त कोल माइंस के कार्यालय में फायरिंग की थी।घटना के बाद गिरोह की ओर से कथित तौर पर भेजी गई रकम स्वराज ठाकुर के खाते में आने की बात भी पुलिस ने जांच में सामने आने की जानकारी दी है।मामले में नाम सामने आए अन्य तीन आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है।
ये सामान किए गए बरामद
पुलिस ने कार्रवाई के दौरान निम्न सामान बरामद किए हैं—
- 7.65 एमएम का एक खाली खोखा
- 7.62 एमएम के 19 खाली खोखे
- तीन स्मार्टफोन
- 32,800 रुपये नकद
बरामद सामान को मामले में महत्वपूर्ण साक्ष्य माना जा रहा है और पुलिस इनके आधार पर घटना की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है।
SIT टीम की कार्रवाई
पूरे मामले के उद्भेदन में गठित SIT में SDPO टंडवा प्रभात रंजन बरबार, टंडवा थाना प्रभारी पप्पू कुमार शर्मा, पिपरवार थाना प्रभारी प्रशान्त कुमार मिश्रा, टंडवा थाना के पुलिस पदाधिकारी प्रभात कुमार, अमित कुमार और रांदीप कुमार, तकनीकी शाखा की टीम तथा टंडवा थाना रिजर्व गार्ड के सशस्त्र बल शामिल रहे।पुलिस की इस कार्रवाई के बाद फायरिंग की घटना से जुड़े नेटवर्क की जांच और तेज हो गई है। अब पुलिस की नजर फरार बताए जा रहे अन्य आरोपियों पर है। साथ ही रंगदारी से जुड़े कथित नेटवर्क और घटना के पीछे की पूरी साजिश की भी जांच की जा रही है।
Author: Ashish Yadav
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