झारखंड की सांस्कृतिक पहचान ‘सोहराय कला’ पहुंची राष्ट्रपति भवन, कलाकारों को मिला सम्मान!

हजारीबाग की माटी से उठकर दिल्ली तक बिखेरा रंग

हजारीबाग (झारखंड):-झारखंड की पारंपरिक और आदिवासी पहचान मानी जाने वाली सोहराय कला अब राज्य की सीमाओं को पार कर देश की राजधानी दिल्ली तक अपनी अमिट छाप छोड़ चुकी है। हजारीबाग जिले के बड़कागांव प्रखंड की मिट्टी में जन्मी यह कला आज राष्ट्रपति भवन की दीवारों पर अपनी अद्भुत रंग-रेखाओं से लोगों को आकर्षित कर रही है।दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन में जब झारखंड के कलाकारों द्वारा उकेरी गई सोहराय चित्रकारी प्रदर्शित की गई, तो देश की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू स्वयं इससे इतनी प्रभावित हुईं कि उन्होंने इन कलाकारों को विशेष रूप से सम्मानित किया। यह पल न सिर्फ कलाकारों के लिए, बल्कि पूरे झारखंड राज्य के लिए गर्व का क्षण था।
सोहराय कला की शुरुआत पारंपरिक रूप से झारखंड के जंगलों, घरों की दीवारों और पत्थरों पर चित्र उकेर कर होती थी। यह कला पशुओं, प्रकृति और आदिवासी जीवनशैली को रंगों के माध्यम से दर्शाती है। वर्षों तक उपेक्षित रही यह लोककला अब राष्ट्रीय मंच पर अपनी पहचान बना रही है।
बड़कागांव से शुरू हुई इस सांस्कृतिक यात्रा ने अब हजारीबाग, गिरिडीह, रामगढ़, बोकारो समेत झारखंड के कई जिलों में विस्तार पाया और अब देश के शीर्ष सांस्कृतिक स्थल तक पहुँच चुकी है। यह इस बात का प्रमाण है कि यदि पारंपरिक विरासत को सही मंच मिले, तो वह विश्वस्तर पर अपनी पहचान बना सकती है।

Author: Rashtriy Samachar
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