शीशे की बोतल ने बिगाड़ा देशी शराब का खेल: 5 साल में 75% घटी बिक्री, महुआ की तरफ बढ़े कदम, जहरीली शराब का खतरा बढ़ाई
राष्ट्रीय समाचार डेस्क
राज्य में बीते पांच वर्षों के दौरान वैध देशी शराब की बिक्री में भारी गिरावट दर्ज की गई है। आबकारी (उत्पाद) विभाग के चौंकाने वाले आंकड़ों से यह अंदेशा जताया जा रहा है कि सस्ती शराब पीने वाला एक बड़ा वर्ग अब महुआ से बनी अवैध शराब की ओर आकर्षित हो रहा है। इस ट्रेंड ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि इससे राज्य में जहरीली शराब कांड (Hooch Tragedy) का खतरा काफी ज्यादा बढ़ गया है।
राजस्व हिस्सेदारी 9% से गिरकर 1.5% पर सिमटी
उत्पाद विभाग के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, वित्तीय वर्ष 2020-21 में पूरे राज्य में 75.30 लाख लंदन प्रूफ लीटर (LPL) देशी शराब की बिक्री हुई थी। वित्तीय वर्ष 2025-26 में यह आंकड़ा भारी गिरावट के साथ महज 25.78 लाख LPL पर आ गया। यानी पांच साल में देशी शराब की बिक्री में करीब 75 प्रतिशत की कमी आई है।
इस गिरावट का सीधा असर सरकारी खजाने पर पड़ा है। पहले राज्य को शराब से मिलने वाले कुल राजस्व में देशी शराब की हिस्सेदारी 8% से 9% हुआ करती थी, जो अब घटकर मात्र 1.5% रह गई है।
प्लास्टिक पाउच बंद होने से बढ़ी कीमतें
विशेषज्ञों और विभागीय सूत्रों के अनुसार, देशी शराब की बिक्री घटने की मूल वजह पैकेजिंग नीति में बदलाव है। उत्पाद नीति 2022 लागू होने से पहले तक राज्य में देशी शराब को प्लास्टिक पाउच में पैक कर बेचा जाता था, जिससे उसकी कीमत कम और आम गरीब उपभोक्ताओं की जेब के अनुकूल थी। तब सस्ती शराब पीने वाले लोग महुआ के बजाय वैध देशी शराब को प्राथमिकता देते थे।
उत्पाद नीति 2022 के तहत प्लास्टिक पाउच को प्रतिबंधित कर शीशे की बोतल में पैकिंग अनिवार्य कर दी गई। कांच की बोतल के इस्तेमाल से देशी शराब की लागत और कीमत दोनों बढ़ गईं, जिसने गरीब उपभोक्ताओं को वैध बाजार से दूर धकेल दिया।
पिछले 6 वर्षों में देशी शराब की बिक्री का लेखा-जोखा:
वित्तीय वर्षबिक्री (लाख LPL में)
- 2020-2175.30 लाख
- 2021-2269.43 लाख
- 2022-2327.24 लाख (नीति बदलने के बाद भारी गिरावट)
- 2023-2414.71 लाख
- 2024-2515.89 लाख
- 2025-2625.78 लाख


