दक्षिणपंथ का उभार: वैश्विक राजनीति से भारत तक बदलती धारा

अवैध प्रवासन, शरणार्थियों और लंबे समय से बसे अल्पसंख्यकों के बीच का अंतर अक्सर राजनीतिक विमर्श में धुंधला कर दिया जाता है। यही धुंधलापन कई देशों में दक्षिणपंथी राजनीति के उभार की ज़मीन तैयार करता है।सोशल मीडिया इस प्रवृत्ति को और तेज़ करता है। भावनात्मक और उत्तेजक सामग्री सबसे तेजी से फैलती है। कई बार दुर्लभ घटनाओं के वीडियो भी वायरल होकर स्थायी संकट का माहौल बना देते हैं। ऐसे वातावरण में वे राजनीतिक दल फलते-फूलते हैं, जो सरल समाधान और सख्त कार्रवाई का वादा करते हैं।

यह क्यों मायने रखता है….?

दक्षिणपंथी दलों का उभार समाज के सभी वर्गों को समान रूप से प्रभावित नहीं करता।सबसे पहले असर प्रवासियों, शरणार्थियों और अल्पसंख्यकों पर पड़ता है, जिन्हें सख्त सीमा नियंत्रण, कठोर शरण प्रक्रियाओं और तीखी सार्वजनिक बयानबाजी का सामना करना पड़ता है।इसके साथ ही वैश्विक बाजारों से जुड़े व्यवसायों में भी अनिश्चितता बढ़ती है। व्यापार समझौते,आयात-निर्यात शुल्क और पर्यावरण मानक राजनीतिक दबाव में आ जाते हैं।अल्पकालिक रूप से मतदाताओं के बीच प्रवासन, जलवायु नीति और विदेश संबंधों को लेकर मतभेद गहरे हो जाते हैं।यूरोपीय संघ जैसे मंचों पर गठबंधन बनाना और चलाना और अधिक जटिल हो जाता है।संसद और परिषद में मजबूत दक्षिणपंथी गुटों के चलते जलवायु लक्ष्यों और कृषि सब्सिडी पर सहमति बनाना कठिन हो जाता है।दीर्घकालीन दृष्टि से यह प्रवृत्ति संवैधानिक संस्थाओं के लिए चुनौती बन सकती है। यदि उदार लोकतंत्र के प्रति संशय रखने वाले दल सत्ता में आते हैं और लंबे समय तक बने रहते हैं, तो वे न्यायपालिका, मीडिया नियमों और चुनावी प्रणालियों में ऐसे बदलाव कर सकते हैं जिन्हें बाद में पलटना आसान नहीं होता।आने वाले समय में प्रमुख यूरोपीय देशों के चुनाव, चरमपंथी दलों पर प्रतिबंध को लेकर बहस और बड़े अंतरराष्ट्रीय शिखर सम्मेलन इस बात की परीक्षा होंगे कि गठबंधन कितने एकजुट रह पाते हैं।
भारत में दक्षिणपंथ की लोकप्रियता…..
भारत में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) या दक्षिणपंथी राजनीति की लगातार सफलता के पीछे कई कारण हैं। भाजपा पिछले लगभग 12 वर्षों से केंद्र की सत्ता में बनी हुई है। इसके पीछे मजबूत नेतृत्व, स्पष्ट राजनीतिक नैरेटिव और कमजोर विपक्ष की अहम भूमिका रही है।एनडीए सरकार ने अपने कार्यकाल में कई कल्याणकारी योजनाएं शुरू कीं, जिनका सीधा लाभ मिडिल और लोअर मिडिल क्लास को मिला।हाल के चुनावों में फ्रीबीज और सीधी लाभ हस्तांतरण योजनाओं ने भी सरकार के लिए जनसमर्थन को मजबूत किया।इसके अलावा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) का व्यापक जमीनी नेटवर्क, प्रभावी सोशल मीडिया रणनीति और विपक्षी दलों की संगठनात्मक कमजोरी ने भाजपा को एक मजबूत और प्रभावशाली राजनीतिक शक्ति के रूप में स्थापित किया है।
Author: Rashtriy Samachar
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