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नीतीश से नाराज़ वोट बंटेगा तो किसको पड़ेगा झटका— पीके या महागठबंधन?

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नीतीश से नाराज़ वोट बंटेगा तो किसको पड़ेगा झटका— पीके या महागठबंधन?

प्रशांत किशोर के उतरने से बिहार का चुनावी मैदान तिकोना, किसका वोट बैंक होगा क्षतिग्रस्त?

पटना:बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में प्रशांत किशोर (PK) को एक्स-फैक्टर माना जा रहा है। उनकी पार्टी जनसुराज के मैदान में उतरने से बिहार की चुनावी जंग अब दो नहीं, बल्कि तिकोनी हो गई है। राजनीति के जानकार मानते हैं कि पीके को मिलने वाला वोट सीधे तौर पर महागठबंधन या NDA के हिस्से से कटेगा। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है — पीके किसका वोट काटेंगे और नुकसान सबसे ज्यादा किसको होगा?

परिदृश्य 1: अगर पीके महागठबंधन के 5% वोट काटते हैं

वोट-वाइब एजेंसी के आकलन के अनुसार, यदि पीके को कुल 10% वोट मिलते हैं, जिनमें से 5% महागठबंधन से और 5% अन्य दलों से कटते हैं, तो स्थिति कुछ यूं दिखेगी:

गठबंधन/दल अनुमानित वोट शेयर

  • NDA 42%
  • महागठबंधन 34%
  • अन्य 15%

इस समीकरण में पीके का सीधा नुकसान महागठबंधन को पहुंचता है।

परिदृश्य 2: अगर पीके NDA के 5% वोट काटते हैं

यदि पीके को मिलने वाले 10% वोट में से 5% NDA से और 5% अन्य दलों से कटते हैं, तो तस्वीर पूरी तरह बदल जाती है:

गठबंधन/दल अनुमानित वोट शेयर

  • महागठबंधन 39%
  • NDA 37%
  • अन्य 15%

इस स्थिति में महागठबंधन NDA से आगे निकल जाता है।

परिदृश्य 3: पीके दोनों के 2.5–2.5% वोट काटें

अगर पीके समान रूप से NDA और महागठबंधन — दोनों से 2.5% वोट काटते हैं, तो:

गठबंधन/दल अनुमानित वोट शेयर

  • NDA 39%
  • महागठबंधन 36%
  • अन्य 15%

यहां नुकसान महागठबंधन को होता है, जबकि NDA पिछड़ने के बावजूद आगे रहता है।

2020 का गणित भी समझ लीजिए

2020 के विधानसभा चुनाव में:

गठबंधन वोट शेयर

  • NDA 37.26%
  • महागठबंधन 37.23%

यानी महज 11 हजार वोट के अंतर से NDA ने सत्ता हासिल कर ली थी। यही वजह है कि बिहार में 1–2% वोट स्विंग भी सत्ता बदल सकता है।

क्या वास्तव में पीके 10% वोट लाएंगे?

प्रशांत किशोर ने राज्य की सभी सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं। हालांकि मतदान से पहले जनसुराज के 4 उम्मीदवार NDA में शामिल हो चुके हैं। मुंगेर से जनसुराज प्रत्याशी संजय कुमार सिंह ने तो वोटिंग से एक दिन पहले ही बीजेपी को समर्थन दे दिया।फिर भी, पीके ने पिछले 3 वर्षों में पदयात्रा और जनता के बीच सीधा संवाद कर मजबूत पकड़ बनाने की कोशिश की है। लेकिन क्या पहले ही चुनाव में ग्रामीण और महिला वोटर उन्हें इतना भरोसा देंगे?राजनीतिक विशेषज्ञ मानते हैं कि बिहार का वोटर अक्सर चौंकाता है, लेकिन नया विकल्प चुनने में सावधानी रखता है।

किसे होगा असली फायदा?

नीतीश कुमार से नाराज़ वोटर का झुकाव अब तक महागठबंधन की ओर जाता रहा है। लेकिन पीके के आने से एंटी-इंकमबेंसी वोट बिखर सकता है, और अगर ऐसा हुआ तो फायदा सीधा NDA को मिलेगा।यानी, पीके भले ही चुनाव न जीतें, लेकिन चुनाव का परिणाम तय जरूर कर सकते हैं।

Rashtriy Samachar

Author: Rashtriy Samachar

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