दुबई के राम से भिड़ेंगे कानपुर के रावण,148 साल पुरानी परेड रामलीला के अनोखे किरदार

कानपुर : उत्तर प्रदेश की ऐतिहासिक परेड रामलीला, जो पिछले 148 वर्षों से सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक रही है, इस बार भी दर्शकों को भक्ति और कला का अनूठा संगम दिखाएगी।श्री रामलीला सोसाइटी परेड के तत्वावधान में हो रहे आयोजन में मथुरा की मंडली मंचन कर रही है।इस बार की खासियत यह है कि मंच पर राम की भूमिका निभा रहे दुबई में कार्यरत अकाउंटेंट सूरज चतुर्वेदी और सीता-रावण के रूप में पिता-पुत्र की जोड़ी आमने-सामने होगी।
कक्षा आठ का छात्र कार्तिकेय चतुर्वेदी ‘सीता’ बनेंगे, जबकि उनके पिता रत्नेश दत्त चतुर्वेदी ‘रावण’ के रूप में नज़र आएंगे। सीता हरण का यह प्रसंग दर्शकों को भावनात्मक और नाटकीय अनुभव देगा।

दिलचस्प किरदार

राम : 24 वर्षीय सूरज चतुर्वेदी, दुबई में अकाउंटेंट।लक्ष्मण : 25 वर्षीय अंकुर चतुर्वेदी, मथुरा निवासी व्यवसायी।हनुमान : 28 वर्षीय अभिषेक दत्त चतुर्वेदी, जो पहले अहिरावण, बाली और शंकर की भूमिका निभा चुके हैं।रावण : रत्नेश दत्त चतुर्वेदी, जो साधु वेश में मंच पर आते हैं और नारद व कुंभकर्ण का भी अभिनय करते हैं।
इस रामलीला की नींव 1877 में पंडित प्रयाग नारायण तिवारी ने डाली थी। पहले स्वरूप परंपरा के तहत बच्चों को 15 दिन की दीक्षा और संस्कारों के बाद मंच पर उतारा जाता था। आज भी मुकुट पूजन की अनूठी परंपरा कायम है।परेड मैदान में होने वाली यह रामलीला सिर्फ नाट्य मंचन नहीं, बल्कि आस्था और परंपरा का जीवंत उत्सव है, जो पीढ़ियों से कानपुर की सांस्कृतिक पहचान बना हुआ है।
Author: Rashtriy Samachar
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