बरसात हो या बवाल, मैदान में हमेशा मुस्तैद रहते हैं DSP चंद्रशेखर आज़ाद

Hazaribagh Desk | गोड्डा:गर्मी की झुलसा देने वाली दोपहरी हो या सावन की मूसलाधार बारिश—महागामा अनुमंडल के डीएसपी चंद्रशेखर आज़ाद की ड्यूटी पर कभी विराम नहीं लगता। झारखंड के सीमावर्ती और संवेदनशील जिले गोड्डा में, जहाँ एक समय नक्सलवाद की गूंज सुनाई देती थी, आज वहाँ कानून का सशक्त चेहरा बनकर खड़े हैं डीएसपी आज़ाद।जब लोग घरों में छत के नीचे बारिश का आनंद ले रहे होते हैं, उस वक़्त ये अधिकारी अपनी वर्दी भीगे तन और बुलंद हौसले के साथ जंगलों की खाक छानते नज़र आते हैं। सड़कों पर पैनी निगाह, दुर्गम इलाकों में निर्णायक मौजूदगी और नक्सली गढ़ों तक पहुँच—डीएसपी चंद्रशेखर आज़ाद का नाम अब अपराधियों के लिए डर और आम नागरिकों के लिए सुरक्षा का पर्याय बन चुका है।

महागामा अनुमंडल में ‘आज़ाद’ का नाम सुनते ही कांप जाते हैं अपराधी

इनकी छवि सिर्फ एक पुलिस अधिकारी की नहीं, बल्कि एक चलते-फिरते अलार्म की बन चुकी है—”अगर चंद्रशेखर आज़ाद आ गए, तो अपराधी रास्ता बदल लें!”
नक्सल प्रभावित इलाकों में अब कानून की मजबूत पकड़ है। कभी जहाँ पुलिस की पहुंच भी मुश्किल थी, अब वहां इनकी मौजूदगी में कानून का झंडा फहरा रहा है।
रील नहीं, रियल हीरो हैं आज़ाद
बारिश के बीच जब डीएसपी चंद्रशेखर आज़ाद अपने जवानों के साथ जंगलों की ओर कूच करते हैं, तो दृश्य किसी फिल्म का सा लगता है—but this is not reel, it’s real. उनका हर कदम अपराधियों के मन में डर और आम लोगों में भरोसा पैदा करता है।
सावन की हर बूंद के साथ जैसे उनके जुनून की आंच और तेज हो जाती है।
गोड्डा को गर्व है ऐसे प्रहरी पर
आज गोड्डा जिले को गर्व है कि उसके पास ऐसा अधिकारी है जो वर्दी नहीं, भरोसा पहनकर निकलता है और लौटता है लोगों के सुरक्षा कवच के रूप में। यह वो नाम है, जो नक्सलियों के हौसले पस्त करता है, और अवैध गतिविधियों को जड़ से उखाड़ने का माद्दा रखता है।
Author: Rashtriy Samachar
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