“आरोग्यंम” अस्पताल या भ्रष्टाचार का अड्डा?

हजारीबाग के जिला परिषद भवन को लेकर भाजपा विधायक ने खड़े किए गंभीर सवाल, की CBI जांच की मांग

हजारीबाग: जिला परिषद के भवन में संचालित आरोग्यम अस्पताल पर अब राजनीतिक और प्रशासनिक विवाद गहराता जा रहा है। कुछ दिन पहले जहां कांग्रेस नेता संजय तिवारी ने इस अस्पताल की वैधता और संचालन पर सवाल उठाए थे, अब भाजपा के सदर विधायक प्रदीप प्रसाद ने भी इस मामले को लेकर ज़ोरदार हमला बोला है।
उन्होंने इसे “लूट का अड्डा” बताते हुए इसकी CBI जांच की मांग की है और प्रशासन की भूमिका पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लगाए हैं।

भवन रोजगार के लिए बना, ‘आरोग्यंम’ ने बना दिया निजी अस्पताल।
विधायक प्रदीप प्रसाद ने आरोप लगाया कि हजारीबाग जिला परिषद का यह भवन मूल रूप से ग्रामीण क्षेत्र के बेरोजगार युवाओं को रोजगार मुहैया कराने के उद्देश्य से बनाया गया था।
लेकिन आश्चर्यजनक रूप से इस भवन को मात्र ₹12 प्रति स्क्वायर फीट के नाममात्र दर पर एक निजी संस्था को ट्रांसफर कर दिया गया, और वहां “आरोग्यंम” नाम से एक निजी अस्पताल खोल दिया गया।उन्होंने कहा, “जिस जगह से सैकड़ों युवाओं को रोजगार मिल सकता था, आज वह एक व्यक्ति की कमाई का जरिया बन गया है। यह लूट की पूरी स्कीम है, और प्रशासन इस पर मौन क्यों है? क्या यह सब किसी राजनीतिक संरक्षण के तहत हो रहा है..?”
प्रशासन की चुप्पी पर सवाल
- विधायक ने पूछा —आखिर इस भवन को एक निजी संस्था को कैसे ट्रांसफर किया गया?
- क्या कोई टेंडर प्रक्रिया अपनाई गई?
- 12 रुपये प्रति स्क्वायर फीट की यह रेट किस आधार पर तय हुई?
- क्या जिला परिषद की बैठक में इसकी मंजूरी दी गई?
- क्या इस भवन के लिए उपयोग की शर्तों का उल्लंघन नहीं हो रहा?
उन्होंने यह भी कहा कि इस पूरी प्रक्रिया में भारी गड़बड़ी और भ्रष्टाचार की आशंका है।
यदि प्रशासन ने जल्द कार्रवाई नहीं की, तो वे इस मुद्दे को विधानसभा में जोरशोर से उठाएंगे और जन आंदोलन भी किया जाएगा।
CBI जांच और गिरफ्तारी की मांग
विधायक ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह सिर्फ एक संपत्ति का दुरुपयोग नहीं, बल्कि जनहित और युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ है। उन्होंने CBI जांच की मांग करते हुए कहा कि इस मामले में जो भी व्यक्ति या अधिकारी शामिल हैं,
उनकी गिरफ्तारी होनी चाहिए।आरोग्यम अस्पताल की सेवा की जांच कौन करेगा? क्या यहां इलाज का रेट और सुविधाएं तय मानकों पर हैं?
संवेदनशील मामला, तत्काल जांच ज़रूरी
भाजपा विधायक के बयान के बाद आमजन और सामाजिक संगठनों में भी इस मुद्दे को लेकर असंतोष बढ़ता जा रहा है। अब देखना यह होगा
कि जिला प्रशासन इस पर क्या कार्रवाई करता है। अगर यह मामला यूं ही दबा रहा, तो इससे न केवल शासन की पारदर्शिता पर सवाल खड़े होंगे, बल्कि जन विश्वास भी टूटेगा।
Author: Rashtriy Samachar
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