एक हाथ से लिखी गई सफलता की नई इबारत: विष्णु मुंडा ने JPSC में हासिल की 282वीं रैंक, JAS पद मिला
रिपोर्ट: आशीष यादव
तमाड़/रांची:-झारखंड के युवा विष्णु मुंडा ने साबित कर दिया है कि कठिनाइयाँ चाहे जितनी भी बड़ी क्यों न हों, अगर इरादे मजबूत हों तो सफलता जरूर मिलती है। विकलांगता, आर्थिक तंगी और पिछड़ेपन के बावजूद विष्णु ने झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की परीक्षा में 282वीं रैंक हासिल कर JAS (झारखंड प्रशासनिक सेवा) पद प्राप्त किया है।
विष्णु मुंडा एक आदिवासी समुदाय से आते हैं। उनके पिता एक गेस्ट हाउस में गार्ड की नौकरी करते हैं और माता गृहिणी हैं। विष्णु बचपन से ही शारीरिक रूप से विकलांग हैं — उनके एक हाथ नहीं है। लेकिन इस कमी को उन्होंने कभी अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया।
पहले प्रयास में नहीं मिली सफलता, लेकिन नहीं मानी हार
विष्णु ने इससे पहले भी JPSC परीक्षा दी थी, लेकिन उस प्रयास में वह मुख्य परीक्षा (Mains) पास नहीं कर सके। अधिकांश लोग पहले असफल प्रयास के बाद हिम्मत हार जाते हैं, लेकिन विष्णु ने हार मानने की बजाय खुद को और निखारने का फैसला किया। कड़ी मेहनत और आत्मविश्वास के साथ उन्होंने दोबारा परीक्षा दी और इस बार सफलता उनके कदम चूमी।
आर्थिक तंगी के बावजूद विष्णु ने कभी किसी तरह की सुविधाओं की कमी को बहाना नहीं बनने दिया। न महंगे कोचिंग, न ही संसाधन – फिर भी विष्णु ने खुद से पढ़ाई की और मेहनत के बल पर आज वह उस मुकाम पर पहुंचे हैं जहाँ से न सिर्फ उनका भविष्य उज्जवल है, बल्कि वह समाज के लिए प्रेरणा भी बन चुके हैं।विष्णु बोले: “मैं चाहता हूँ कि मेरे जैसे बच्चे हार न मानें”हमसे बातचीत में विष्णु मुंडा ने कहा मैं चाहता हूँ
कि मेरे जैसे और भी विकलांग और आदिवासी बच्चे हार न मानें। मुश्किलें आएंगी, लेकिन मेहनत से हर बाधा पार की जा सकती है। मेरी ये सफलता मेरी माँ-बाप की दुआओं और मेरे हौसले की जीत है।”विष्णु की कहानी न केवल शिक्षा क्षेत्र में प्रेरणा देती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि
अगर राज्य सरकार और समाज मिलकर दिव्यांग और पिछड़े वर्ग के होनहार छात्रों को उचित मार्गदर्शन और अवसर दें, तो वे भी प्रशासनिक सेवा जैसे ऊँचे पदों तक पहुँच सकते हैं।
Author: Ashish Yadav
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