हाई कोर्ट सख्त: पेश नहीं होने पर अब्दुल हकीम के खिलाफ NBW जारी।

चतरा एसपी को गिरफ्तारी कर 1 अप्रैल को कोर्ट में पेश करने का निर्देश।

राष्ट्रीय समाचार डेस्क:झारखंड हाई कोर्ट ने बंदी प्रत्यक्षीकरण (हेबियस कॉर्पस) याचिका की सुनवाई के दौरान सख्त रुख अपनाते हुए मोहम्मद अब्दुल हकीम के खिलाफ नन बेलेबल वारंट (NBW) जारी कर दिया है। न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने यह आदेश तब दिया, जब कोर्ट के निर्देश के बावजूद अब्दुल हकीम सुनवाई में उपस्थित नहीं हुए।सुनवाई के दौरान चतरा के पुलिस अधीक्षक सुमित कुमार अग्रवाल कोर्ट में हाजिर हुए। अदालत ने नाराजगी जताते हुए एसपी को निर्देश दिया कि अब्दुल हकीम को गिरफ्तार कर आगामी 1 अप्रैल को कोर्ट में पेश किया जाए। मामले में राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता राजीव रंजन ने पक्ष रखा।यह याचिका युवक की मां अख्तरी खातून द्वारा दायर की गई है। पिछली सुनवाई में कोर्ट ने मामले में तथ्यों को छिपाने की आशंका जताई थी और विस्तृत जांच रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया था। साथ ही अख्तरी खातून, मोहम्मद गुलाम और मोहम्मद अब्दुल हकीम को 19 मार्च को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का आदेश दिया गया था, लेकिन अब्दुल हकीम अनुपस्थित रहे।

क्या है मामला?
जानकारी के अनुसार, 26 जनवरी की रात लावालौंग थाना पुलिस ने रंगदारी मामले में संदेह के आधार पर एक मैट्रिक परीक्षार्थी को घर से उठा लिया था। आरोप है कि पुलिस ने युवक को पूछताछ के बाद भी नहीं छोड़ा और करीब 10 दिनों तक अवैध रूप से हिरासत में रखा। इस कारण उसकी मैट्रिक परीक्षा भी छूट गई।बाद में हाई कोर्ट में याचिका दायर होने के बाद युवक को घर भेज दिया गया। कानून के अनुसार किसी भी व्यक्ति को हिरासत में लेने के 24 घंटे के भीतर मजिस्ट्रेट के सामने पेश करना अनिवार्य होता है, लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं किया गया।फिलहाल हाई कोर्ट इस मामले की लगातार सुनवाई कर रहा है और अगली सुनवाई 1 अप्रैल को निर्धारित की गई है।
Author: Rashtriy Samachar
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