सीसीएल अशोक परियोजना में कथित अवैध उगाही से डी.ओ. होल्डर व लिफ्टर परेशान।

सूत्रों का दावा—स्थानीय पुलिस और कथित विस्थापित नेताओं की मिलीभगत।

राष्ट्रीय समाचार डेस्क

चतरा/पिपरवार:सीसीएल के अशोक परियोजना क्षेत्र में कोयला परिवहन के नाम पर कथित अवैध वसूली किए जाने का आरोप सामने आया है। प्राप्त सूत्रों के अनुसार, ट्रक मालिकों और कोयला डी.ओ. (डिलीवरी ऑर्डर) होल्डरों से प्रति टन 60 से 70 रुपये तक उगाही की जा रही है। इस कथित उगाही में स्थानीय पुलिस तंत्र और स्वयं को विस्थापित नेता बताने वाले कुछ लोगों की मिलीभगत होने की चर्चा है।
कथित उगाही का तरीका (सूत्रों के हवाले से)
सूत्र बताते हैं कि लोकल सेल से निकलने वाले प्रत्येक टन कोयले पर लगभग 60–70 रुपये की वसूली की जाती है। इसमें से अनुमानित 40–45 रुपये प्रति टन पुलिस व्यवस्था तक पहुँचने का दावा है, जबकि शेष 20–25 रुपये कुछ स्थानीय कथित विस्थापित नेताओं में बांटे जाते हैं।सूत्रों के अनुसार, इस कथित वसूली रैकेट से जुड़े कुछ स्थानीय नाम सामने आ रहे हैं। इनमें कथित तौर पर महेंद्र गंझू का नाम नेतृत्वकारी भूमिका में बताया जा रहा है। यह भी चर्चा है कि इसके पीछे नीरज गंझू उर्फ नीरज भोक्ता का प्रभाव माना जा रहा है, जो पूर्व में एक प्रतिबंधित संगठन से जुड़ा रहा और वर्तमान में राजनीतिक संरक्षण का लाभ मिलने की बात कही जा रही है। जानकारी यह भी है कि पतरातू डैम के पास “अलेक्सा रिसॉर्ट” नामक एक रिसॉर्ट उसके द्वारा संचालित किया जा रहा है।सूत्र यह भी दावा करते हैं कि रैयत विस्थापित मोर्चा के एक पदाधिकारी मोहम्मद इक़बाल हुसैन का नाम भी संरक्षण देने वालों की सूची में शामिल है, हालांकि इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
कथित तौर पर हर महीने लाखों की वसूली
सूत्र बताते हैं कि अशोक परियोजना से प्रतिमाह लगभग 1–1.5 लाख टन कोयले का लोकल सेल संचालन होता है। इस आधार पर प्रतिमाह लाखों रुपये की अवैध उगाही होने का दावा किया जा रहा है, जो कथित तौर पर एक नेटवर्क के माध्यम से आगे पहुंचाई जाती है।
जांच की मांग तेज
डी.ओ. होल्डरों, लिफ्टरों एवं स्थानीय लोगों का कहना है कि यह अत्यंत गंभीर मामला है। उन्होंने मांग की है कि उच्चस्तरीय जांच कर सत्य उजागर किया जाए तथा दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो, ताकि अवैध वसूली और दबाव की कथित प्रथा पर रोक लग सके।
Author: Rashtriy Samachar
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